वैज्ञानिकों ने 415 मरीजों के करीब 25 लाख सैंपल को कंप्यूटर न्यूरॉल नेटवर्क के हिसाब से तैयार किया और उसे 13 श्रेणियों में बांट दिया। इसमें मैलिंगनेंट ग्लियोमा, लिंफोमा, मेटास्टिक ट्यूमर और मेनिनजियोमा ट्यूमर शामिल थे।
इसके अलावा 278 रोगी जिनकी तीन अलग-अलग अस्पतालों में ब्रेन सर्जरी होनी थी उनके सैंपल को पैथोलॉजी लैब में भेज दिया तो कुछ को ऑपरेशन के दौरान प्रयोग के तौर पर होने वाली एआई जांच के लिए भेज दिया।
इसमें पाया गया कि अगर पैथोलॉजिस्ट सैंपल की जांच के दौरान एआई का प्रयोग करें तो उनको ब्रेन ट्यूमर की पहचान करने में समय भी कम लगेगा और इलाज भी सरल होगा।
इन लक्षणों को समय रहते पहचानें
- सिर में दर्द रहना, झटके आना
- बोलने में तकलीफ शुरू होना
- चलने-फिरने में दिक्कत होना
- अचानक से दिखाई देने में दिक्कत
- लड़खड़ाना, संतुलन न बन पाना