अजरबैजान की राजधानी में चल रहे संयुक्त राष्ट्र के जलवायु सम्मेलन कॉप-29 के अंतिम दिन जलवायु वित्त मसौदा पेश किया गया, जिसके तहत विकसित देशों को 2035 तक गरीब देशों की मदद के लिए प्रति वर्ष 250 अरब डॉलर देने का प्रस्ताव रखा गया।
हालांकि इस मसौदे का विकसित देशों ने आलोचना की है। वहीं, विकासशील देश इस राशि को कम बता रहे हैं। उनका कहना है कि राशि की और बढ़ाया जाए। दो सप्ताह तक चले इस सम्मेलन में अभी भी जलवायु वित्त मसौदा पर बात नहीं बन पाई है। पनामा के प्रतिनिधि जुआन कार्लोस मोंटेरे गोमेज ने कहा, मैं बहुत नाराज हूं। यह हास्यास्पद है। उन्होंने प्रस्तावित राशि को बहुत कम बताया। उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि अमीर देश चाहते हैं कि हमारी पृथ्वी नष्ट हो जाए। इस बीच, एक यूरोपीय वार्ताकार ने कहा नया मसौदा सौदा बहुत महंगा है। इससे वित्तपोषण में योगदान देने वाले देशों की संख्या में वृद्धि नहीं हो सकती। वार्ताकार ने कहा, कोई भी इस राशि से सहज नहीं है, क्योंकि यह बहुत अधिक है। बता दें कि मसौदे के मुताबिक यह राशि यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, नॉर्वे, कनाडा, न्यूजीलैंड और स्विट्जरलैंड को देना होगा।
विकासशील देश भी स्वेच्छा से दे सकते हैं अहम योगदान
मसौदे में विकासशील देशों को स्वेच्छा से योगदान करने के लिए आमंत्रित किया गया है। हालांकि मसौदे में इस बात पर जोर दिया गया है कि जलवायु वित्त में भुगतान करने से संयुक्त राष्ट्र में विकासशील राष्ट्रों के रूप में उनकी स्थिति प्रभावित नहीं होगी। बता दें कि नया जलवायु वित्त लक्ष्य (एनसीक्यूजी) का उद्देश्य विकासशील देशों को कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों से निपटने में मदद करना है।
लक्ष्य में सार्वजनिक व निजी स्रोतों से वित्त पोषण भी शामिल
जलवायु वित्त मसौदे में 2035 तक सालाना 1.3 लाख करोड़ डॉलर जलवायु वित्त जुटाने का व्यापक लक्ष्य भी रखा गया है। इसमें सभी सार्वजनिक और निजी स्रोतों से वित्त पोषण शामिल होगा। वहीं, वार्ताकारों ने चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी राशि के लक्ष्य को हासिल कर पाना मुश्किल होगा। दूसरी तरफ, विकासशील देशों का कहना है कि जलवायु चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। बढ़ती चुनौतियों का सामना करने के लिए उन्हें वित्तीय सहायता चाहिए।
खेल-सेहत पर खतरे से खिलाड़ी चिंतित
पिछले एक दशक से पेशेवर ट्रायथलीट प्रज्ञा मोहन ने कहा, उनके मूल देश भारत में गर्मी इतनी अधिक है कि वहां अब वे प्रशिक्षण नहीं ले सकती हैं। अमेरिकी डिस्कस थ्रोअर सैम मैटिस ने यूजीन, ओरेगॉन में 2021 अमेरिकी ओलंपिक ट्रायल में तापमान 44 डिग्री तक बताया, जिससे कुछ लोग बेहोश तक हुए। न्यूजीलैंड की फुटबाल खिलाड़ी केटी रूड ने टोक्यो ओलंपिक की तैयारी के लिए हीट चैंबर्स में प्रशिक्षण को याद किया। सभी बढ़ती गर्मी से त्रस्त थे।
अंतिम चरण में सहयोग का आग्रह
कॉप-29 जलवायु शिखर सम्मेलन के मेजबान अजरबैजान ने अंतिम चरण में भागीदार देशों से मतभेदों को दूर करने और वित्त समझौते के साथ आने का आग्रह किया। विश्व सरकारों को एक व्यापक योजना पर सहमति बनाने का काम सौंपा गया है, जिसमें अमीर देशों से गरीब देशों को ग्लोबल वार्मिंग के बिगड़ते प्रभावों से निपटने में मदद करने का संकल्प लेने को कहा गया।
गंभीर चेतावनियों से निपटना जरूरी
कॉप-29 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने चेताया कि 2024 रिकॉर्ड पर सबसे गर्म वर्ष होने की राह पर है, और 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार करने वाला पहला वर्ष साबित हो सकता है। इस बिंदु से आगे जलवायु प्रभाव बेहद विनाशकारी हो सकते हैं। जिनेवा स्थित आंतरिक विस्थापन निगरानी केंद्र (आईडीएमसी) के अनुसार- तूफान, बाढ़ और सूखे जैसी जलवायु संबंधी घटनाओं से भी निपटना जरूरी है।