भारतीय मूल के एक वैज्ञानिक ने सिंधु घाटी को लेकर किए गए अध्ययन में नए खुलासे किए हैं। इस अध्ययन के अनुसार जलवायु परिवर्तन की वजह से मानसून के स्वरूप में बदलाव प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता के उदय और पतन का कारण हो सकता है। अध्ययन में उत्तर भारत के 5,700 वर्ष के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।
अमेरिका स्थित रोचेस्टर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के निशांत मलिक ने अपने विश्लेषण में उत्तर भारत में प्राचीन काल में जलवायु के स्वरूप का अध्ययन करने के लिए एक नई गणितीय पद्धति का उपयोग किया।
इसके बारे में ‘चाओस: एन इंटरडिसीप्लिनरी जर्नल ऑफ नॉनलिनियर साइंस’ में एक अनुसंधान रिपोर्ट प्रकाशित की गई है। इसमें कहा गया है कि दक्षिण एशिया में गुफाओं में जमा खनिज निक्षेप में विशेष रासायनिक अवस्थाओं की मौजूदगी का पता लगाकर वैज्ञानिक क्षेत्र में पिछले 5,700 साल तक की मानसून की बारिश का रिकॉर्ड बना सके।
हालांकि मलिक ने कहा कि जलवायु को समझने के लिए विशिष्ट रूप से इस्तेमाल गणितीय पद्धतियों के साथ प्राचीन जलवायु का अध्ययन करना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। मलिक ने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता का पतन क्यों हुआ, इस बारे में अब तक अनेक मान्यताएं हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि अब तक किसी गणितीय प्रणाली से यह काम नहीं किया गया।