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Climate Change Alert: जलवायु परिवर्तन से बढ़ा खतरा, यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक पहुंच सकता है चिकनगुनिया

Sun, 07 Jun 2026 05:28 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

जलवायु परिवर्तन के कारण चिकनगुनिया फैलाने वाले एशियाई टाइगर मच्छरों का दायरा बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दशकों में मध्य यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पूर्वी एशिया के ठंडे क्षेत्र भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।

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चिकनगुनिया की समस्या - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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कभी चिकनगुनिया को मुख्य रूप से गर्म जलवायु वाले देशों की बीमारी माना जाता था, पर अब वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन इस बीमारी का भूगोल बदल सकता है। बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण ऐसे मच्छरों का दायरा तेजी से बढ़ रहा है जो चिकनगुनिया वायरस फैलाते हैं। इसके परिणामस्वरूप आने वाले दशकों में दुनिया के कई ठंडे क्षेत्र भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।

भारत के लिए भी बढ़ सकती है चिंता

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प्रतिष्ठित जर्नल फ्रंटियर्स इन सेलुलर एंड इन्फेक्शन माइक्रोबायोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार सदी के अंत तक उत्तर-पूर्वी उत्तरी अमेरिका, मध्य यूरोप और पूर्वी एशिया के कई हिस्से चिकनगुनिया के नए हॉटस्पॉट बन सकते हैं। अध्ययन में भारत के लिए भी चिंता जताई गई है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यदि बीमारी नए क्षेत्रों में फैलती है तो 1.21 करोड़ भारतीय इसके जोखिम में आ सकते हैं।

लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन, नागासाकी यूनिवर्सिटी और इंटरनेशनल वैक्सीन इंस्टीट्यूट से जुड़े वैज्ञानिकों के एक अन्य अध्ययन के अनुसार, हर साल दुनिया भर में करीब 1.44 करोड़ लोग चिकनगुनिया के जोखिम में हैं। इनमें से करीब 51 लाख लोग भारत में हैं। भविष्य में यह संख्या वैश्विक स्तर पर 3.49 करोड़ तक पहुंच सकती है।

एशियाई टाइगर मच्छर बना सबसे बड़ी वजह
बीमारी के बढ़ते खतरे के पीछे बड़ी भूमिका एशियाई टाइगर मच्छर, यानी एडीज एल्बोपिक्टस निभा सकता है। अब तक चिकनगुनिया मुख्यत: एडीज एजिप्टी मच्छर से फैलता था, जो गर्म  व आर्द्र क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है। 2005-06 में वायरस में आनुवंशिक बदलाव की पहचान हुई जिसके बाद वायरस एडीज एल्बोपिक्टस के जरिए भी फैलने लगा। यह मच्छर ठंडे मौसम में भी जीवित रह सकता है।

क्या है चिकनगुनिया?

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चिकनगुनिया एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित मच्छर के काटने से फैलता है। इसके प्रमुख लक्षणों में तेज बुखार, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द, थकान और शरीर पर चकत्ते शामिल हैं। अधिकांश मरीज कुछ सप्ताह में ठीक हो जाते हैं, लेकिन कई मामलों में जोड़ों का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है।

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