कॉप30 प्रमुख बोले- स्वच्छ ऊर्जा के मामले में दुनिया का नेतृत्व कर रहे भारत और चीन
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कॉप-30 सम्मेलन की शुरुआत के मौके पर इसके अध्यक्ष आंद्रे कोर्रिया डो लागो ने कहा, चीन ने क्लीन एनर्जी सिस्टम विकसित करने के एजेंडे पर उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि तकनीक, कम शुल्क में काम और तकनीक के इस्तेमाल का स्केल क्या होगा? इन तीनों पहलुओं को चीन ने असाधारण तरीके से हैंडल किया है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में स्वच्छ ऊर्जा से चलने वाले सिस्टम विकसित करने में भी ये तीन घटक सबसे अहम रहे हैं। इसकी मदद से ही दुनिया तेजी से क्लीन एनर्जी की तरफ अग्रसर हो रही है।
उन्होंने कहा कि तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन की गति पर नकेल कसने में भारत और चीन मुखर और स्पष्ट दृष्टिकोण के साथ सामने आए हैं। दोनों देशों ने पूरी दुनिया में क्लीन टेक्नोलॉजी के खर्च को घटाने में भी काफी अहम भूमिका निभाई है।
वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन में परिवर्तनकारी भूमिका निभाने के लिए भारत और चीन की प्रशंसा करते हुए कोर्रिया ने कहा, दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ कार्रवाई को 'बेहद स्पष्ट रूप से' अपनाया है। स्वच्छ प्रौद्योगिकियों की लागत कम करने का जिक्र करते हुए लागो ने कहा, चीन और भारत दोनों वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन के भविष्य को आकार दे रहे हैं। उन्होंने कहा, चीन के पास बहुत उन्नत तकनीक है और उसका पैमाना ऐसा है जिसकी तुलना केवल भारत से की जा सकती है। भारत भी कुछ हद तक यही कर रहा है। उनके पास भी शानदार कंपनियां, इंजीनियर और बेमिसाल प्रतिभा के धनी लोग हैं। दोनों एक ही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में चीन के योगदान से जुड़े एक सवाल के जवाब में कॉप-30 प्रमुख कोर्रिया ने कहा, लागो ने स्वच्छ प्रौद्योगिकी निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा पैनल, पवन ऊर्जा और बैटरी उत्पादन में चीन को नेतृत्व करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण चीन इन सभी जरूरी चीजों की कीमत घटाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग कर रहा है।चीन ने प्रमुख हरित तकनीकों की लागत घटाने में जैसी मदद की है इसका पूरी दुनिया में असर पड़ा है।
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गौरतलब है कि भारत भी COP-30 के मंच पर राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन नीति (NDC) जैसी योजनाओं को प्रस्तुत कर सकता है। इसमें पूरी दुनिया को यह बताया जाएगा कि वह जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों के लिए वह कैसे तैयारी करेगा। इस प्रस्तुति से पहले शुक्रवार को COP-30 के नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान देश का पक्ष रखते हुए, ब्राजील में भारतीय राजदूत दिनेश भाटिया ने कहा था कि भारत बहुपक्षवाद और पेरिस समझौते के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि पेरिस समझौते के एक दशक बाद भी बहुत से काम किए जाने बाकी हैं। विकसित देशों में हो रहे उत्सर्जन को कम करने में और तेजी लानी होगी। साथ ही जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई के लिए जरूरी फंड भी देना होगा।