अदालतों पर बढ़ते बोझ पर CJI की बड़ी चिंता
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा है कि दुनिया भर में बढ़ते कानूनी विवादों के बीच अब समय आ गया है कि अदालतों में लंबी लड़ाई के बजाय आपसी सहमति से समाधान पर ज्यादा ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता यानी मेडिएशन अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि जरूरी व्यवस्था बन चुकी है। ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता प्रक्रिया अब कई तकनीकी और कानूनी अड़चनों का सामना कर रही है।
आखिर सीजेआई सूर्यकांत ने क्या बड़ा संदेश दिया?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मेडिएशन, आर्बिट्रेशन और अदालतें विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि कंपनियों और कानूनी संस्थाओं को अपनी सोच बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि अब सवाल यह नहीं होना चाहिए कि मामला कहां लड़ा जाए, बल्कि यह होना चाहिए कि विवाद का समाधान कैसे निकाला जाए। उनके मुताबिक लंबे कानूनी संघर्ष से समय, पैसा और संसाधन तीनों का नुकसान होता है।
मध्यस्थता को क्यों बताया गया जरूरी?
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मेडिएशन के जरिए विवादों का जल्दी और शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि अदालतों में मामलों का बोझ लगातार बढ़ रहा है और ऐसे में वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली बेहद जरूरी हो गई है। उनके मुताबिक इससे दोनों पक्षों के रिश्ते भी बेहतर बने रहते हैं और फैसले लंबे समय तक टिकाऊ साबित होते हैं।
आर्बिट्रेशन प्रक्रिया में क्या दिक्कतें सामने आ रही हैं?
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन अब प्रक्रियागत बाधाओं में उलझता जा रहा है। कई मामलों में कानूनी तकनीकी कारणों से विवाद जल्दी खत्म नहीं हो पाते। उन्होंने कहा कि अगर कानूनी प्रक्रिया आसान और तेज नहीं होगी, तो कंपनियों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट में हुए इस कार्यक्रम में भारत और इंग्लैंड की कानूनी प्रणालियों में बढ़ते सहयोग और व्यावसायिक विवादों के समाधान पर चर्चा हुई। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि आधुनिक दौर में अदालतों की भूमिका सिर्फ फैसला सुनाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाधान निकालने की दिशा में भी काम होना चाहिए।