एक वक़्त था कि लोग पढ़ने और नौकरी करने के लिए न्यूयॉर्क या लंदन जाया करते थे। दूसरे यूरोपीय और अमरीकी शहर भी विदेश में करियर बनाने वालों की पसंद हुआ करते थे। मगर अब वक़्त बदल रहा है। आज की तारीख़ में चीन और दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों में बड़े पैमाने पर नौकरियों और तरक़्क़ी के मौके मिल रहे हैं। बड़ी तादाद में लोग शंघाई, सिंगापुर, हांगकांग जैसे शहरों में जाकर नौकरी कर रहे हैं।
आज चीन में करीब 8 लाख पचास हज़ार विदेशी नौकरी कर रहे हैं। इनमें से एक तिहाई लोग शंघाई में काम कर रहे हैं। पहले लंदन और न्यूयॉर्क, विदेशी नागरिकों के लिए करियर के लिहाज से पहली पसंद हुआ करते थे। लेकिन आज दुबई, सिंगापुर और शंघाई जैसे शहरों में करियर बनाने को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
ब्रिटेन में नौकरी देने वाली कंपनी हेज एशिया की प्रमुख क्रिस्टीन राइट कहती हैं कि अगर आप थोड़ी चुनौती भरी जगह पर काम करने को राज़ी हैं, आप जोखिम लेना चाहते हैं और नया हुनर सीखना चाहते हैं, तो आपके लिए एशियाई देशों में ज़्यादा बेहतर मौक़े हैं। क्योंकि आज इन्हीं देशों की अर्थव्यवस्थाएं ज़्यादा तेज रफ़्तार से आगे बढ़ रही हैं।
इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइज़ेशन और एशियन डेवेलपमेंट बैंक के मुताबिक दक्षिण पूर्व एशिया के दस देशों को 2010 से 2025 के बीच करीब डेढ़ करोड़ हुनरमंद कामगारों की जरूरत होगी। इनमें से ज़्यादातर नौकरियां इन देशों की राजधानी में होंगी।
मिसाल के तौर पर तेज़ी से तरक़्क़ी कर रहे चीन को सर्विस सेक्टर, डिजिटल इकॉनोमी और तकनीक की दुनिया में हुनरमंद लोगों की जरूरत होगी। इसके अलावा साइबर सिक्योरिटी, वित्तीय तकनीक और डिजिटल एनालिटिक्स के सेक्टर के एक्सपर्ट भी चीन को चाहिए होंगे।
इनमें से ज़्यादातर नौकरियां चीन के पूर्वी इलाक़े में स्थित शहरों में होंगी। दुबई पिछले कई सालों से विदेशी नागरिकों के लिए पसंदीदा जगह रही है। यहां कारोबार और करियर को तेज़ी देने के तमाम मौक़े मिलते आए हैं। दुबई में बेरोजगारी महज 0।19 फ़ीसद है। लेकिन तेल और गैस के क्षेत्र में आई मंदी की वजह से दुबई में लोगों के लिए रोजगार के मौक़े कम हो रहे हैं।