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आपकी ज़िंदगी बदलने वाले शहर

Thu, 27 Jul 2017 04:11 PM IST
बीबीसी हिन्दी
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शंघाई
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एक वक़्त था कि लोग पढ़ने और नौकरी करने के लिए न्यूयॉर्क या लंदन जाया करते थे। दूसरे यूरोपीय और अमरीकी शहर भी विदेश में करियर बनाने वालों की पसंद हुआ करते थे। मगर अब वक़्त बदल रहा है। आज की तारीख़ में चीन और दक्षिणी पूर्वी एशियाई देशों में बड़े पैमाने पर नौकरियों और तरक़्क़ी के मौके मिल रहे हैं। बड़ी तादाद में लोग शंघाई, सिंगापुर, हांगकांग जैसे शहरों में जाकर नौकरी कर रहे हैं।
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आज चीन में करीब 8 लाख पचास हज़ार विदेशी नौकरी कर रहे हैं। इनमें से एक तिहाई लोग शंघाई में काम कर रहे हैं। पहले लंदन और न्यूयॉर्क, विदेशी नागरिकों के लिए करियर के लिहाज से पहली पसंद हुआ करते थे। लेकिन आज दुबई, सिंगापुर और शंघाई जैसे शहरों में करियर बनाने को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।


ब्रिटेन में नौकरी देने वाली कंपनी हेज एशिया की प्रमुख क्रिस्टीन राइट कहती हैं कि अगर आप थोड़ी चुनौती भरी जगह पर काम करने को राज़ी हैं, आप जोखिम लेना चाहते हैं और नया हुनर सीखना चाहते हैं, तो आपके लिए एशियाई देशों में ज़्यादा बेहतर मौक़े हैं। क्योंकि आज इन्हीं देशों की अर्थव्यवस्थाएं ज़्यादा तेज रफ़्तार से आगे बढ़ रही हैं।
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इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइज़ेशन और एशियन डेवेलपमेंट बैंक के मुताबिक दक्षिण पूर्व एशिया के दस देशों को 2010 से 2025 के बीच करीब डेढ़ करोड़ हुनरमंद कामगारों की जरूरत होगी। इनमें से ज़्यादातर नौकरियां इन देशों की राजधानी में होंगी।



मिसाल के तौर पर तेज़ी से तरक़्क़ी कर रहे चीन को सर्विस सेक्टर, डिजिटल इकॉनोमी और तकनीक की दुनिया में हुनरमंद लोगों की जरूरत होगी। इसके अलावा साइबर सिक्योरिटी, वित्तीय तकनीक और डिजिटल एनालिटिक्स के सेक्टर के एक्सपर्ट भी चीन को चाहिए होंगे।


इनमें से ज़्यादातर नौकरियां चीन के पूर्वी इलाक़े में स्थित शहरों में होंगी। दुबई पिछले कई सालों से विदेशी नागरिकों के लिए पसंदीदा जगह रही है। यहां कारोबार और करियर को तेज़ी देने के तमाम मौक़े मिलते आए हैं। दुबई में बेरोजगारी महज 0।19 फ़ीसद है। लेकिन तेल और गैस के क्षेत्र में आई मंदी की वजह से दुबई में लोगों के लिए रोजगार के मौक़े कम हो रहे हैं।

सिंगापुर
अब संयुक्त अरब अमीरात, तरक़्क़ी करने के नए जरिए तलाश रहा है। पिछले साल अमीरात ने इंडस्ट्रियल स्ट्रैटेजी 2030 का एलान किया था। इसके तहत नागरिक उड्डयन, इंजीनियरिंग और फार्मास्यूटिकल सेक्टर में 27 हज़ार नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखा गया था।


इंटरनेशनल कंसल्टेंसी कंपनी मर्सर के मारियो फेरारो कहते हैं कि जहां काबिलियत की डिमांड ज़्यादा हो, वहां करियर बनाना बेहतर होता है। आज दुनिया में जितने और जिस तरह के काबिल लोग चाहिए, उसकी विकासशील देशों में काफ़ी कमी है। इसीलिए इन देशों में जाकर करियर बनाने के बेहतर मौक़े आज देखने को मिल रहे हैं।


2010 में चीन ने थाउज़ैंड्स टैलेंट्स प्लान के नाम से अभियान शुरू किया था। इसके तहत काबिल विदेशी लोगों को चीन की यूनिवर्सिटी और दूसरे संस्थानों में काम करने के मौक़े दिए जाते हैं। मलेशिया हुनरमंद विदेशी लोगों को लंबे वक़्त तक रहकर काम करने का वीज़ा देता है।


इसी तरह यूरोपीय देश नीदरलैंड एक्सपैट सेंटर के नाम से 2008 से कार्यक्रम चला रहा है। इसके तहत एम्सटर्डम और आस-पास के इलाक़े में काम करने वाले विदेशी नागरिकों की मदद की जाती है।

विदेशी नागरिकों के काम करने के लिए दो शहर दुनिया भर में सबसे ज़्यादा मशहूर हैं। ये हैं हांगकांग और सिंगापुर। एक सर्वे के मुताबिक हांगकांग में 68 फ़ीसद लोगों को अपने काम से तसल्ली है। सिंगापुर में ये आंकड़ा 62 फ़ीसद है।


मर्सर के मारियो फेरारो कहते हैं कि इन शहरों में अच्छा रहन-सहन और कम टैक्स होना, यहां के लोगों की तसल्ली की बड़ी वजह है। हालांकि दूसरे देशों में करियर बनाने की सोच रहे लोगों के लिए मौजूदा सियासी माहौल चुनौतियां पैदा कर सकता है।
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हांगकांग
आज दुनिया भर में राष्ट्रवाद की लहर है। तमाम देश, दूसरे देशों के नागरिकों के लिए अपने दरवाज़े बंद कर रहे हैं। मसलन, ब्रिटेन ने यूरोपीय यूनियन से अलग होने का फ़ैसला किया। इसके बाद ब्रिटेन में रह रहे दूसरे यूरोपीय देशों के नागरिकों के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।


सिंगापुर में भी सरकार कंपनियों को स्थानीय लोगों को तरज़ीह देने को कह रही है। सिंगापुर के लोगों ने शहर में बढ़ती भीड़ पर नाख़ुशी जताई है। यानी वो नहीं चाहते कि दूसरे देशों से लोग आकर सिंगापुर में रहें।

अमरीका जैसे देश अपने यहां आने वाले अप्रवासियों के लिए नियम सख़्त कर रहे हैं। कुल मिलाकर माहौल ऐसा है कि हर देश, विदेशी नागरिकों के लिए अपने दरवाज़े बंद कर रहा है। इसके उलट आज की पीढ़ी को दूसरे देश में जाकर काम करने में कोई दिक़्कत नहीं है।


बहुत से युवा तो दूसरे देशों में जाकर मुफ़्त में काम करके नया हुनर सीख रहे हैं। लंदन की सीआरसीसी कंपनी ने 2008 से लेकर अब तक करीब 6500 युवाओं को दूसरे देशों में इंटर्नशिप कराई है। इनमें से चालीस फ़ीसद युवा अमरीका के थे, तो 35 प्रतिशत ब्रिटेन के।

सीआरसीसी के एडवर्ड हॉलरॉयड पियर्स कहते हैं कि जब आपको विदेशों में काम करने का मौक़ा मिलता है, तो आप नया हुनर सीखने के साथ-साथ नई जबान भी सीखते हैं। काम का माहौल नया होता है। वर्क-कल्चर नया होता है।


ऐसे में आपको बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है। तो, इन बातों का फ़ायदा उठाकर आप भी उन शहरों में अपने लिए मौक़े तलाशिए, जो आपके करियर को नई उड़ान दे सकते हैं।
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