बांग्लादेश की हाईकोर्ट ने रविवार को जेल में बंद हिंदू अधिकार नेता चिन्मय कृष्ण दास को दो और मामलों में जमानत दे दी। ये दोनों मामले तोड़फोड़ और पुलिस के काम में बाधा डालने से जुड़े हैं। हाईकोर्ट की जस्टिस केएम जाहिद सरवार और जस्टिस शेख अबू ताहेर की पीठ ने यह फैसला सुनाया। इससे चिन्मय को कानूनी राहत जरूर मिली है, लेकिन उनकी तत्काल रिहाई अभी भी संभव नहीं है।
छह मामलों में अब तक क्या हुआ?
चिन्मय कृष्ण दास के खिलाफ कुल छह आपराधिक मामले दर्ज हैं। उनके वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने बताया कि अब उन्हें चार मामलों में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। पिछले महीने भी उन्हें दो मामलों में जमानत मिली थी। ये मामले तोड़फोड़, हमले और सरकारी काम में बाधा डालने से जुड़े थे। रविवार को मिली दो नई जमानत के बाद चार मामलों में उन्हें राहत मिल गई है।
फिर चिन्मय कृष्ण दास जेल से बाहर क्यों नहीं आ सकते?
इसकी वजह उनके खिलाफ चल रहे बाकी मामले हैं। राजद्रोह के मामले में उनकी जमानत पर अभी रोक लगी हुई है। इसके अलावा सरकारी वकील सैफुल इस्लाम अलीफ की हत्या से जुड़ा मामला भी चल रहा है। इस मामले की सुनवाई चटगांव स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल में हो रही है। इसलिए चार मामलों में जमानत मिलने के बावजूद उनकी रिहाई तुरंत नहीं होगी।
चिन्मय की गिरफ्तारी कब और किस आरोप में हुई थी?
चिन्मय कृष्ण दास को नवंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का कथित तौर पर अपमान करने का आरोप लगाया गया था। इसी आरोप में उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज हुआ। उनकी गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन हुए और सांप्रदायिक तनाव भी बढ़ा। बाद में उनके खिलाफ कई और मामले दर्ज किए गए। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश और तोड़फोड़ जैसे आरोप शामिल हैं।
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हत्या का मामला किस घटना से जुड़ा है?
हत्या का मामला चटगांव में हुई एक घटना से जुड़ा है। इसमें सरकारी अभियोजक सैफुल इस्लाम अलीफ की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। यह घटना उन कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान हुई, जो चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे। इसी मामले की सुनवाई फिलहाल चटगांव स्पीडी ट्रायल ट्रिब्यूनल में चल रही है। दूसरी ओर, चिन्मय के खिलाफ राजद्रोह मामले में मिली जमानत पर रोक बनी हुई है।
भारत ने चिन्मय की गिरफ्तारी पर क्या कहा था?
चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी पर भारत ने उस समय गहरी चिंता जताई थी। भारत ने ढाका से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा था। यह मामला ऐसे समय सामने आया था, जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव बढ़ गया था। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली में शरण ली थी। इसी दौर में दोनों देशों के रिश्ते ठंडे पड़ गए।
चिन्मय कृष्ण दास कौन हैं और उनका संगठन क्या करता है?
चिन्मय कृष्ण दास इस्कॉन से जुड़े रहे हैं। वह हिंदू सम्मिलित सनातन जागरण जोत नाम के संगठन के प्रवक्ता हैं। 2024 में शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद इस संगठन ने बांग्लादेश में कई रैलियां की थीं। इन रैलियों में अल्पसंख्यकों के अधिकार, उनकी सुरक्षा और देश में अशांति के बीच संरक्षण की मांग उठाई गई थी। उनकी गिरफ्तारी के बाद यह मामला बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा से जुड़े बड़े मुद्दों में शामिल हो गया।
चिन्मय कृष्ण दास को अब छह में से चार मामलों में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। लेकिन राजद्रोह मामले की जमानत पर रोक और हत्या के मामले की सुनवाई के कारण उनकी तत्काल रिहाई नहीं हो सकती। उनकी गिरफ्तारी ने 2024 में बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन और सांप्रदायिक तनाव को बढ़ाया था। भारत ने भी उनकी गिरफ्तारी के बाद हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।