चीन के उइगुर मुसलमान (सांकेतिक)
- फोटो : सोशल मीडिया
पत्रकार और लेखक थिओडोरोस बेनाकिस ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि उइगरों के खिलाफ चीन की नरसंहार नीति एक नए चरण में पहुंच गई है, क्योंकि वुमाओ आर्मी (50 सेंट आर्मी) इस्लाम और पैगंबर का अपमान कर रही है।
'वुमाओ आर्मी' सरकार समर्थित इंटरनेट टिप्पणीकारों (कमेंटेटर्स) का एक समूह है। इसे अक्सर उइगुर की धार्मिक भावनाओं को आहत करते हुए देखा जाता है। यह समूह सोशल मीडिया पर अक्सर मुसलमानों को चरमपंथी व आतंकवादी के रूप में प्रचारित करता है। जबकि, चीन पाकिस्तान, इंडोनेशिया या अरब प्रायद्वीप जैसे रूढ़िवादी इस्लामिक देशों के साथ घनिष्ठ संबंध रखता है। चीन अब मुसलमानों के साथ भेदभाव करने और उन्हें अलग-थलग करने व झिंजियांग में चीनी आबादी को बढ़ाने की नीतियों को लागू करने के लिए 'इस्लामाफोबिया' का इस्तेमाल कर रहा है।
लेखक के मुताबिक, वुमाओ आर्मी सोशल मीडिया के जरिए इस्लाम और पैगंबर का अपमान करती है और ईशनिंदा करती है। उन्होंने आगे लिखा, अनियंत्रित ट्रोलिंग और इस्लाम की निंदा ने सारी हदें पार कर दी हैं और यूजर्स के इस समूह ने कुछ ऐसी टिप्पणियां कीं हैं, जो दुनिया के किसी अन्य हिस्से में की जातीं तो जनता का आक्रोश बढ़ जाता। वुमाओ आर्मी झिंजियांग में मुसलमानों के खिलाफ अभद्र भाषा फैलाने, इस्लाम का अपमान करने और बीजिंग में भेदभाव को सही ठहराने में सरकार की मदद करती है।
इससे पहले 2015 के चार्ली हेब्दो को लेकर हमले के बाद एक यूजर ने साफतौर पर कहा था कि धर्म का जातीयता से कोई लेना-देना नहीं है। हमारे देश की धार्मिक नीति और जातीय नीति में 108,000 मील की दूरी है। कोई भी यह शर्त नहीं रख सकता है कि एक निश्चित जातीय समूह को एक निश्चित धर्म में विश्वास करना चाहिए।
लेखक ने बताया, हाल ही में चीन के मुसलमानों ने खुलासा किया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग की नई चीनी संस्कृति नीति को मजबूत करने के लिए झिंजियांग और मुख्य भूमि में एक 'आकस्मिक अभ्यास' के रूप में इस्लामाफोबिया का इस्तेमाल किया जाता है। वीबो (चीन का ट्विटर स्पेस) का इस्तेमाल इस्लाम को छोड़ने वाले चीन नागरिकों को 'सही' ठहराने के लिए कहा जाता है। कई चीनी नागरिकों ने नई संस्कृति नीति के लिए अपना पूर्ण समर्थन व्यक्त किया है और झिंजियांग से उइगुर मुसलमानों का सफाया करने पर सहमत हुए हैं।