चीन अपने गुब्बारे को नियंत्रित करने में सक्षम था। जिससे वह इकट्ठी गई जानकारी को रियल टाइम पर चीन भेजने में सक्षम था। साथ ही इसमें यह भी कहा गया है कि जासूसी गुब्बारे के जरिए चीन ने जो जानकारी प्राप्त की वह इलेक्ट्रॉनिक संकेतों से प्राप्त की गई थी।
इस साल की शुरुआत में अमेरिका के हवाई क्षेत्र में देखे गए चीनी जासूसी गुब्बारे को लेकर एक नई जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि ये चीनी जासूसी गुब्बारा कई संवेदनशील सैन्य अड्डों से खुफिया जानकारी इकट्ठी की। साथ ही यह इस जानकारी को रियल टाइम में बीजिंग भेजने में सक्षम था। समाचार एजेंसी पीटीआई ने एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से इसकी जानकारी दी है।
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चीनी जासूसी गुब्बारे पर हुआ नया खुलासा
मीडिया रिपोर्ट में तीन अनाम अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि चीन अपने गुब्बारे को नियंत्रित करने में सक्षम था। जिससे वह इकट्ठी गई जानकारी को रियल टाइम पर चीन भेजने में सक्षम था। साथ ही इसमें यह भी कहा गया है कि जासूसी गुब्बारे के जरिए चीन ने जो जानकारी प्राप्त की वह इलेक्ट्रॉनिक संकेतों से प्राप्त की गई थी। इस जानकारी में बेस कर्मियों का संचार शामिल किया जा सकता है।
यह भी सामने आया है कि अगर बाइडन प्रशासन ने गुब्बारे के जरिए खुफिया जानकारी भेजे जाने से रोकने की कोशिश ना की होती तो चीन संवेदनशील साइटों से बहुत अधिक खुफिया जानकारी एकत्र कर सकता था।
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जनवरी में दिखा था गुब्बारा
जनवरी के अंत में संयुक्त राज्य अमेरिका के हवाई क्षेत्र में तीन बसों के आकार का एक संदिग्ध चीनी जासूसी गुब्बारा देखा गया था। अमेरिका के मुताबिक,चीनी जासूसी गुब्बारे ने पहली बार 28 जनवरी को अलास्का से अमेरिकी हवाई क्षेत्र में प्रवेश किया था। इसके बाद अगले चार दिनों में वह मोंटाना में माल्मस्ट्रॉम एयर फ़ोर्स बेस के ऊपर उड़ान भरते देखा गया, जहाँ अमेरिका की अपनी परमाणु हथियार रखे हैं। इसके बाद अमरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ गया था। अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही तनावपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों में और तनाव बढ़ने का परिणाम यह हुआ था कि अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकेन ने इस साल फरवरी में होने वाली बीजिंग की अपनी यात्रा को अचानक स्थगित कर दिया था।
चीन की यह थी प्रतिक्रिया
वहीं, चीन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि गुब्बारा सिविलियन एयरशिप है,जिसका इस्तेमाल शोध के लिए किया गया था। उसने कहा था कि यह एयरशिप रास्ता भटक गया था। चीनी सरकार ने इसके लिए गलती मानी थी। बाद में चार फरवरी को अमेरिका ने दक्षिण कैरोलिना के तट पर गुब्बारे को मार गिराया था।