Chinese Speaker Li Zhanshu in Kathmandu with K.P. Sharma Oli
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चीन की संसद- नेशनल पीपुल्स कांग्रेस के स्पीकर ली झानशु की यहां राजनीतिक नेताओं के साथ हो रही बातचीत पर विशेषज्ञों की आंखें टिकी हुई हैं। ली अपनी यात्रा के पहले ही दिन नेपाली नेताओं से चीन की कई उम्मीदों को पूरा करवाने में कामयाब रहे। इनमें चीन की महत्त्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से जुड़ी परियोजनाओं पर काम तेज करना शामिल है। इसके अलावा नेपाल की तरफ से यहां की प्रतिनिधि सभा के स्पीकर अग्नि प्रसाद सपकोटा ने वन चाइना पॉलिसी के प्रति अपने देश की वचनबद्धता फिर से जताई। उसके बाद ली का ध्यान अलग-अलग पार्टियों के नेताओं से बातचीत पर टिक गया।
मंगलवार को खास ध्यान विपक्ष के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की ली के साथ हुई बातचीत पर रहा। ओली चीन के पसंदीदा नेता रहे हैं। पांच साल पहले चीन ने नेपाल के सभी कम्युनिस्ट नेताओं को एकजुट होने के लिए प्रेरित किया था। ओली को नई बनी पार्टी का नेता चुना गया था और वे प्रधानमंत्री बने थे। बाद में एकीकृत कम्युनिस्ट पार्टी बिखर गई। ली से ओली की मुलाकात के बाद कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) के विदेश विभाग के प्रमुख राजन भट्टराई ने मीडियाकर्मियों को बताया- ‘ली ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तरफ से ओली को अच्छी सेहत के लिए शुभकामना दी। साथ ही नेपाल और चीन के बीच अतीत में हुए समझौतों पर अमल के प्रति उन्होंने वचनबद्धता दोहराई।’
ओली से ओली से बातचीत के दौरान कहा कि नेपाल एक ‘स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है, जिसे अपनी विदेश नीति खुद तय करनी चाहिए।’ भट्टराई के मुताबिक ओली ने यूएमएल की तरफ से वन चाइना पॉलिसी के प्रति वचनबद्धता को दोहराया। वन चाइना पॉलिसी का मतलब ताइवान और तिब्बत के मामलों में चीन की नीति का समर्थन समझा जाता है। भट्टराई ने कहा- हमारी पार्टी ने ये वादा दोहराया है कि वह नेपाल की जमीन का इस्तेमाल चीन या किसी पड़ोसी देश के खिलाफ नहीं होने देगी। लेकिन भट्टराई ने दावा किया कि ली और ओली के बीच नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टियों के बीच गठबंधन बनाने के मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई।
ओली से मिलने के बाद ली के नेतृत्व में चीनी प्रतिनिधिमंडल ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओइस्ट सेंटर) के नेता पुष्प कमल दहल से मुलाकात की। ओली और दहल जब चीनी प्रतिनिधिमंडल के साथ मिले, तो उनके साथ पार्टी के अन्य नेताओं का दल भी मौजूद था।
हालांकि मंगलवार को चीनी प्रतिनिधिमंडल की प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा और विदेश मंत्री नारायण खड़का के साथ भी मुलाकात का कार्यक्रम था, लेकिन पर्यवेक्षकों का ज्यादा ध्यान गैर-सरकारी मुलाकातों पर टिका रहा। इसकी वजह अगले 20 नवंबर को नेपाल में होने वाला आम चुनाव है। पर्यवेक्षकों की दिलचस्पी यह जानने में रही है कि क्या चीन नेपाल के आम चुनाव के समीकरण तय करने में कोई भूमिका निभाएगा।
सरकारी स्तरों की वार्ता में चीन दल का ध्यान बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव और विदेश नीति संबंधी मुद्दों पर टिका रहा है। उधर नेपाली नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को और विकसित करने पर जोर दिया है। उन्होंने चीन-नेपाल सीमा को दशहरा से पहले व्यापार के लिए खोलने की मांग की है।