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Chinese Propaganda: कितना असरदार है चीन का प्रचार तंत्र, फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट से छिड़ी बहस

Wed, 21 Sep 2022 07:33 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग

सार

Chinese Propaganda: अमेरिकी संस्थान फ्रीडम हाउस ने अपने अध्ययन में 30 देशों में चीनी प्रचार तंत्र की पहुंच का अध्ययन किया। उनमें से आधे से अधिक देशों में पाया गया कि चीनी मीडिया का प्रभाव ‘बहुत उच्च’ से ‘उच्च’ श्रेणी में है। 18 देशों में यह पाया गया कि बीते तीन वर्षों में वहां प्रचार संबंधी चीन की कोशिशें सघन हो गई हैं...
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chinese propaganda - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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चीन तेजी से वैश्विक मीडिया कैंपेन में अपनी पहुंच और प्रभाव को बढ़ा रहा है। उसके प्रचार तंत्र की पहुंच अब एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका तक पहुंच चुकी है। यहां तक कि अमेरिका में भी चीनी प्रचार तंत्र पैठ बनाने में कामयाब हो चुका है। ये बात हाल में जारी एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट में कही गई है।

अमेरिकी संस्थान फ्रीडम हाउस ने अपने अध्ययन में 30 देशों में चीनी प्रचार तंत्र की पहुंच का अध्ययन किया। उनमें से आधे से अधिक देशों में पाया गया कि चीनी मीडिया का प्रभाव ‘बहुत उच्च’ से ‘उच्च’ श्रेणी में है। 18 देशों में यह पाया गया कि बीते तीन वर्षों में वहां प्रचार संबंधी चीन की कोशिशें सघन हो गई हैँ। रिपोर्ट में कहा गया है- ‘चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) और उसकी तरफ से काम करने वाली एजेंसियां मीडिया नैरेटिव को आकार देने और आलोचनात्मक रिपोर्टिंग को दबाने के लिए अधिक जहीन और शक्तिशाली तौर-तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं।’

रिपोर्ट में कहा गया है कि उन देशों में चीन समर्थक सामग्रियों का मैनस्ट्रीम मीडिया से व्यापक रूप से वितरण किया जाता है। उधर जो मीडिया घराने चीन सरकार के खिलाफ खबरें छापते हैं, उन्हें धमकाया जाता है। इसके लिए साइबर उत्पीड़न का सहारा लिया जाता है, जिसके लिए फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल होता है। ये प्रवृत्तियां 2019 के बाद से बहुत बढ़ गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है- कई देशों का मीडिया चीनी दबाव का मुकाबला कर लेता है। लेकिन इस बीच चीन के तरीके ज्यादा जहीन और आक्रामक हो गए हैं, जिनकी वजह से यह पहचान मुश्किल हो जाती है कि कौन-सी सामग्री चीनी प्रचार का हिस्सा है।

लेकिन चीनी मीडिया प्रोजेक्ट जर्नलिज्म मॉनिटर नाम की एजेंसी के संचालक डेविड बुनडुर्स्की ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम को बताया कि पश्चिमी मीडिया और सरकारों की तरफ से होने वाले नकारात्मक प्रचार का मुकाबला करने के लिए चीन ने अपनी कोशिशें तेज की हैं, ताकि पश्चिमी प्रचार उसकी प्रगति को प्रभावित ना कर पाए। उन्होंने कहा- ‘सीपीसी और चीन की सरकार अब दुनिया भर में उस प्रयास में खूब जोर लगा रही है, जिसे वे विमर्श शक्ति कहते हैं।’

कुछ विश्लेषकों ने कहा है कि चीनी प्रचार वास्तव में कितना असरदार रहा है, इसका जायजा लेना कठिन है। इसलिए कि अमेरिकी संस्था पिउ रिसर्च सेंटर के 2020 के एक अध्ययन से सामने आया था कि इस प्रचार के बावजूद दुनिया में चीन को लेकर नकारात्मक सोच में कोई बदलाव नहीं आया है।

फ्रीडम हाउस की रिपोर्ट पर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह तथ्यों पर आधारित नहीं है और दुर्भावना से प्रेरित है। मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा था कि इस रिपोर्ट में चीनी मीडिया की सामान्य रिपोर्टिंग को सीपीसी से उनके कथित संबंधों से जोड़ कर देखा गया है, जबकि पश्चिमी मीडिया की ‘झूठी रिपोर्टिंग’ के बारे में इसमें आंखें मूंद ली गई हैं।   

लेकिन इस रिपोर्ट की सह-लेखिका और फ्रीडम हाउस की रिसर्च डायरेक्टर सराह कुक ने दावा किया है कि चीन ने ताइवान, अमेरिका और ब्रिटेन के पत्रकारों के खिलाफ आक्रामक और टकराव भरी रणनीति अपना रखी है। भारत में भी उसने मीडिया सर्वरों की हैकिंग कराई है। इन कारणों से चिंता बढ़ गई है।

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