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कोरोना पर चीनी लैब का दावा, बिना वैक्सीन के ही यह नई दवा कोविड-19 को रोकेगी

Tue, 19 May 2020 02:33 PM IST
अनवर अंसारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

  • कोरोना वैक्सीन को लेकर चीन की लैब का दावा
  • लैब ने कहा, एक नई दवा बिना वैक्सीन के ही कोविड-19 को रोकेगी
  • लैब ने कहा, चूहों पर किए गए परीक्षण में मिली सफलता
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coronavirus vaccine - फोटो : Social Media
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विस्तार
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वैश्विक महामारी कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है। अभी तक इस खतरनाक वायरस के लिए कोई वैक्सीन तैयार नहीं हो पाई है। दुनियाभर के देशों में वैज्ञानिक इस वायरस की काट खोजने में जुटे हुए हैं। 

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वहीं, इस कड़ी में चीन के वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्होंने ऐसी एक दवा बनाई है जिससे कोरोना वायरस को खत्म किया जा सकता है। चीन की एक प्रयोगशाला में इसे तैयार किया जा रहा है। इनका मानना है कि इस दवा से कोरोना वायरस को फैलने से रोका जा सकता है। 

शोधकर्ताओं ने कहा है कि चीन के प्रतिष्ठित पेकिंग विश्वविद्यालय में वैज्ञानिकों द्वारा एक दवा का परीक्षण किया गया है। यह दवा न केवल संक्रमित व्यक्ति के ठीक होने की अवधि को कम कर देती है, बल्कि एक छोटी अवधि के लिए वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा भी तैयार करती है। 
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संक्रमित चूहों पर सफल रहा परीक्षण
विश्वविद्यालय के बीजिंग एडवांस्ड इनोवेशन सेंटर फॉर जियोनॉमिक्स के निदेशक सन्ने शी ने कहा कि जानवरों पर इस दवा का परीक्षण सफल रहा है। उन्होंने कहा कि जब हमनें संक्रमित चूहों में इस न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी (निष्क्रिय करने वाले एंटीबॉडी) को इंजेक्ट किया तो पांच दिन बाद वायरल लोड 2500 कारक तक कम हो गए थे। शी ने कहा कि इसका मतलब इस दवा का चिकित्सीय प्रभाव हुआ है। 

यह दवा न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी का प्रयोग करती है, जिसे शी की टीम द्वारा कोरोना से ठीक हो चुके 60 मरीजों के खून से लिया गया है। न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी को मानव की प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा तैयार किया गया है, ताकि यह वायरस को कोशिकाओं को संक्रमित होने से रोकने में मदद करे।

बीमारी से ठीक होने की अवधि को भी कम कर सकती है दवा
शी की टीम द्वारा किए गए अध्ययन को साइंटिफिक जर्नल सेल में रविवार को प्रकाशित किया गया। इसमें सुझाव दिया गया कि एंटीबॉडी का प्रयोग वायरस का संभावित इलाज हो सकता है और यह बीमारी से ठीक होने की अवधि को भी कम कर सकता है। 

शी ने कहा कि वह और उनकी टीम एंटीबॉडी की तलाश में दिन-रात काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी विशेषज्ञता प्रतिरक्षा-विज्ञान या विषाणु विज्ञान के बजाय एकल-कोशिका जीनोमिक्स है। जब हमें यह एहसास हुआ कि एकल-कोशिका जीनोमिक दृष्टिकोण प्रभावी रूप से उस एंटीबॉडी को पा सकता है तो हम बेहद ही रोमांचित हो गए। 

इस साल तक तैयार हो जाएगी दवा
शी ने कहा आगे कहा कि इस साल तक दवा तैयार हो जानी चाहिए, ताकि 48 लाख लोगों को संक्रमित करने वाले और 3,15,000 लोगों की जान लेने वाले इस वायरस से रक्षा हो सके। 

उन्होंने कहा कि क्लिनिकल परीक्षण के लिए काम जारी है। इसका परीक्षण ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में किया जाएगा क्योंकि चीन में मामले कम हो गए हैं। उन्होंने कहा कि आशा यही की जा रही है कि ये न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबाडी इस वायरस से लड़ने में एक खास दवा बनकर उभरे, जिससे इस महामारी को रोका जा सके। 

एक स्वास्थ्य अधिकारी ने पिछले सप्ताह कहा था कि चीन के पास मानव परीक्षण चरण के लिए कोरोना वायरस की पांच संभावित वैक्सीन हैं। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि इस वायरस के लिए वैक्सीन तैयार करने में 12 से 18 महीनों का समय लग सकता है। 

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