एक तरफ जहां भारत की जीडीपी में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। विश्व बैंक ने भारत के जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है। विश्व बैंक ने कहा है कि वित्त वर्ष 2019-2020 में भारत की जीडीपी में बढ़त दर सिर्फ पांच फीसदी रह सकती है। वहीं हमारे पड़ोसी देश चीन के एक प्रांत का दावा चौंकाने वाला है। चीनी प्रांत जियांगसू की आबादी आठ करोड़ है और इसमें केवल 17 लोगों के गरीब होने का दावा किया गया है। यह दावा सरकारी आंकड़ों में किया गया है।
वहीं इसे कई लोगों ने हास्यास्पद बताया है और आधिकारिक आंकड़ों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया है। पूर्वी चीन के जियांगसू प्रांत के गरीबी उन्मूलन अधिकारियों ने नए डाटा में आठ करोड़ पांच लाख की आबादी वाले प्रांत की जीडीपी 7.2 ट्रिलियन युआन या एक डॉलर ट्रिलियन से ज्यादा होने का दावा किया है। जियांगसू प्रांत मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात हब के रूप में जाना जाता है। यह दक्षिण चीन के गुआंगडोंग के बाद देश का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला प्रांत है।
इस सप्ताह के शुरू में प्रांतीय विधायिका में नए आंकड़ों की घोषणा करते हुए एक अधिकारी ने कहा कि प्रांत के दो करोड़ 54 लाख ( 2.54 मिलियन) गरीब लोगों में से 99.9 प्रतिशत से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है, केवल छह परिवारों में 17 लोग शामिल हैं जो अत्यधिक गरीबी के निशान के नीचे बने हुए हैं। बीजिंग के अनुसार, 2018 के अंत तक चीन में एक करोड़ 66 लाख (16.6 मिलियन) ग्रामीण गरीब (देश भर में) थे, जो सालाना 2300 युआन (लगभग 23000 रुपये) से कम पर जिंदगी गुजार रहे थे और सरकार ने कहा था कि इनमें से एक करोड़ लोगों को 2019 के अंत तक गरीबी से उबारने की उम्मीद है।
एक स्थानीय अधिकारी ने कहा कि जियांगसू में गरीबी राहत का वर्तमान मानक वैसे निवासी हैं जो एक वर्ष में 6,000 युआन (लगभग 61 हजार रुपये) कमाते हैं। सबसे पहले इस आंकड़े को बीजिंग स्थित टाइम्स ने प्रकाशित किया था, जिसपर गहन चर्चा हुई कि ये आंकड़े सच हैं या नहीं। इस विषय से संबंधित हैशटैग को चीन के ट्विटर जैसी सीना वीबो पर नौ करोड़ से अधिक बार देखा गया है। एक व्यक्ति ने हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (एससीएमपी) के हवाले से वीबो पर 'जिआंग्सु के गरीबी में केवल 17 लोग हैं' हैशटैग के साथ कहा, 'क्या संयोग है, मैं उन 17 लोगों में से एक हूं।'
एक अन्य वीबो यूजर ने कहा, 'एक प्रांत में केवल एक दर्जन लोग बचे हैं जिन्हें गरीबी से नहीं निकाला गया है। तो गरीबी उन्मूलन विभाग को तुरंत समाप्त कर दिया जाना चाहिए।'
एक वीबो यूजर ने पूछा, 'मैं यह नहीं मानता। क्या सूबे में कोई बेरोजगार नहीं है? कोई भिखारी नहीं?
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के बाद से देश ने वैश्विक गरीबी में 70 प्रतिशत से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हुए, 80 करोड़ ( 800 मिलियन) से अधिक लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है।
जियांगसू का एक गांव जहां हर शख्स है करोड़पति
चीन के जियांगसू प्रांत का एक गांव है वाक्शी, जिसे सुपर विलेज का नाम दिया गया है। गांव के नाम के अनुसार ही यहां के लोग शान से अपना जीवनयापन करते हैं। जानकारी के मुताबिक इस गांव के हर शख्स के खाते में लगभग 1.50 करोड़ रुपये से भी ज्यादा राशि जमा है। केवल इतना ही नहीं यहां के हर नागरिक के पास आलीशान घर और चमचमाती गाड़ियां हैं। इस गांव को करोड़ों डॉलर की कंपनियों का गढ़ माना जाता है जिसमें स्टील और शिपिंग जैसी मुख्य कंपनियां शामिल हैं।
बताया जाता है कि गांव के ज्यादातर घर एक जैसे हैं। बाहर से देखने में यह घर किसी होटल की तरह नजर आते हैं। वाक्शी को दुनिया का सबसे अमीर गांव कहा जाता है। गांव में हेलिकॉप्टर, टैक्सी और थीम पार्क मौजूद हैं। यहां की सड़कें रोशनी से चमकती रहती हैं।