चीन अपनी हरकत से बाज नहीं आ रहा है। अब अमेरिकी अधिकारियों ने संदेह जताया है चीनी सरकार से जुड़े हैकर्स ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप और दामाद जेरेड कुशनर को निशाना बनाने की कोशिश की है। बता दें, हैकर्स बड़े पैमाने पर 'साइबर जासूसी अभियान' चला रहे हैं, जिससे रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेता प्रभावित हो रहे।
कॉल और मैसेज पर नजर
यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है, जब अमेरिका में पांच नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होने है। एक मीडिया रिपोर्ट में कुछ सूत्रों के हवाले से बताया गया कि हैकर्स एरिक ट्रंप और जेरेड कुशनर के कॉल और मैसेज के डाटा को निशाना बना रहे हैं। इससे दर्जनों लोग प्रभावित हो सकते हैं।
यह लोग भी निशाने पर
इसके अलावा, जिन लोगों पर हैकर्स की नजर है उनमें पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उनके रनिंग मेट जेडी वेंस और हैरिस-वॉल्ज अभियान से जुड़े व्यक्ति शामिल हैं। इसके अलावा, सीनेट के बहुमत नेता चक शूमर के कर्मचारियों सहित प्रमुख डेमोक्रेट को भी निशाना बनाया गया है। अब तक यह स्पष्ट नहीं है कि हैकर्स ने कौन-सी जानकारी हासिल की है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों के फोन कम्यूनिकेशन विदेशी जासूसों के लिए हमेशा से अहम माने जाते रहे हैं।
एफबीआई और साइबर सुरक्षा एजेंसी सीआईएसए जांच में जुटी
एफबीआई और साइबर सुरक्षा एजेंसी सीआईएसए ने कहा कि वे इस मामले की जांच कर रहे हैं, जिसमें चीनी हैकर्स द्वारा अमेरिकी दूरसंचार नेटवर्क में अनधिकृत पहुंच की कोशिश की गई थी। प्रभावित कंपनियों को सूचित करने और सहायता देने के बाद, एफबीआई और सीआईएसए जांच में तेजी लाई है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने सबसे पहले इस घटना की जानकारी दी थी और बताया कि चीनी हैकिंग अभियान के तहत पिछले कुछ महीनों में कई अमेरिकी दूरसंचार कंपनियों को निशाना बनाया गया है।
चीन इन कंपनियों को बना चुका है निशाना
विशेषज्ञों का मानना है कि ये हैकर्स राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। हैकर्स ने एटीएंडटी, वेरिज़ोन और ल्यूमेन जैसी प्रमुख अमेरिकी टेलीकॉम कंपनियों को निशाना बनाया है। हालांकि, चीनी सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब चीन, ईरान और रूस अमेरिकी चुनाव के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करने या निगरानी करने का प्रयास कर रहे हैं। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, चीन ने राष्ट्रपति चुनाव में कोई खास हस्तक्षेप नहीं किया है, लेकिन सोशल मीडिया अभियानों के जरिए कम से कम 10 अन्य चुनावी दौड़ों को निशाना बनाया है।