अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की चीन संबंधी चयन समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी कंपनियां अब जिम्बाब्वे के 90 फीसदी लिथियम भंडार पर नियंत्रण रख रही हैं। इससे स्थानीय समुदायों के शोषण और पर्यावरण को नुकसान को लेकर चिंता बढ़ गई है।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट में केन्या के कैपिटल न्यूज के हवाले से बताया गया है कि भ्रष्टाचार और शासन से जुड़ी कमजोरियों के कारण कुछ कंपनियां कम जवाबदेही के साथ काम कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चीनी खनन कंपनियां मजदूरों को असुरक्षित परिस्थितियों में काम करने पर मजबूर करती हैं और इससे गंभीर जल प्रदूषण, भूजल का दोहन और खनिजों की तस्करी जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं।
खनन क्षेत्रों के पास रहने वाले समुदायों ने धूल प्रदूषण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले खतरे को लेकर भी शिकायतें की हैं। शुरुग्वी इलाके के निवासियों ने जिम्बाब्वे की संसद से अपील की है कि खुले गड्ढे वाली खदानों से हो रहे पर्यावरणीय नुकसान, स्वास्थ्य जोखिम और मानवाधिकार उल्लंघन पर कार्रवाई की जाए। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ कंपनियां विषैले रसायनों और भारी धातुओं का उपयोग करती हैं, जिससे मुतेवेकी नदी प्रदूषित हुई है और जैव विविधता को नुकसान पहुंचा है।
स्थानीय लोगों ने क्या आरोप लगाए?
इसके अलावा, स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि शिकायत निवारण तंत्र कमजोर है। कुछ कंपनियां नियमों से बचने के लिए अधिकारियों को रिश्वत देती हैं, ताकि सरकार की पाबंदियों के बावजूद लिथियम का निर्यात जारी रह सके।
लिथियम निर्यात पर प्रतिबंध से पड़ेगा असर
जिम्बाब्वे सरकार ने लिथियम कंसंट्रेट के निर्यात पर प्रतिबंध को जनवरी 2027 से घटाकर 2026 तक लागू करने का फैसला किया है, क्योंकि यह खनिज इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी उद्योग के लिए रणनीतिक रूप से अहम है। यह कदम चीन पर बड़ा असर डाल सकता है, क्योंकि जिम्बाब्वे के करीब 90 फीसदी लिथियम निर्यात पर चीन की हिस्सेदारी है।
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रिफाइनिंग-प्रोसेसिंग को बढ़ावा देना चाहती सरकार
सरकार अब देश में ही लिथियम की शुद्धिकरण प्रक्रिया (रिफाइनिंग) और उसे उपयोग योग्य बनाने की प्रक्रिया (प्रोसेसिंग) को बढ़ावा देना चाहती है, ताकि रोजगार बढ़े और मूल्य संवर्धन हो सके। साथ ही वह अमेरिका समेत अन्य देशों के साथ साझेदारी करने की भी योजना बना रही है।
एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया कि 2025 में तिब्बत में शुरू हुआ चीन का बड़े पैमाने पर लिथियम उत्पादन वहां की स्वायत्तता को धीरे-धीरे कमजोर कर रहा है, क्योंकि इसके लाभ मुख्य रूप से क्षेत्र से बाहर चले जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक लाभ पूर्वी चीन की ओर जाते हैं, जबकि पर्यावरणीय नुकसान, सांस्कृतिक प्रभाव और निगरानी का बोझ तिब्बत के लोगों को उठाना पड़ता है।