भारत सरकार के सूत्रों ने बताया कि चीनी रक्षा मंत्री के अनुरोध पर यह बैठक आयोजित की गई थी। पूर्वी लद्दाख में कई जगह भारत और चीन की सेनाओं के बीच गतिरोध जारी है। तनाव तब और बढ़ गया था जब पांच दिन पहले पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र पर कब्जे का असफल प्रयास किया, वो भी तब जब दोनों पक्ष कूटनीतिक और सैन्य बातचीत के जरिये विवाद को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ऊंचाई वाले कई इलाकों पर मुस्तैद है और चीन की किसी भी गतिविधि को नाकाम करने के लिए उसने 'फिंगर-2' और 'फिंगर-3' में अपनी मौजूदगी और मजबूत की है। चीन ने भारत के कदम का कड़ा विरोध किया है। हालांकि भारत का कहना है कि ये ऊंचे क्षेत्र एलएसी में उसकी तरफ वाले हिस्से में हैं। सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे ने भी बृहस्पतिवार और शुक्रवार को लद्दाख का दो दिवसीय दौरा किया और क्षेत्र में सुरक्षा हालात की गहन समीक्षा की।
शांति के लिए आक्रामक रवैया ठीक नहीं
वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर अक्सर उकसावे की हरकत करने वाले चीन पर निशाना साधते हुए भारत ने शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के मंच से दो टूक लहजे में कहा है कि शांति के लिए आक्रामक रवैया ठीक नहीं है। मतभेदों को दूर करने के लिए आपसी भरोसा जरूरी है। रूस के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को चीन का नाम लिए बगैर कहा, एक-दूसरे के प्रति विश्वास, गैर-आक्रामकता और संवेदनशीलता का माहौल एससीओ क्षेत्र की शांति, स्थिरता और सुरक्षा के लिए अहम है।
दुनिया की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी एससीओ में रहती है
मॉस्को में एससीओ के रक्षामंत्रियों की बैठक में चीन के रक्षामंत्री जनरल वेई फेंगहे की मौजूदगी में राजनाथ ने कहा, दुनिया की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी एससीओ में रहती है। ऐसे में शांतिपूर्ण, स्थिर और सुरक्षित क्षेत्र का माहौल बनाने के लिए विश्वास और सहयोग, गैर-आक्रामकता, अंतरराष्ट्रीय नियम-कायदों के लिए सम्मान, एक दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशीलता और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान की जरूरत है।