जिस समय अमेरिका चीन पर तमाम तरह के व्यापार प्रतिबंध लगाने में जुटा हुआ है, चीनी कंपनियों ने उसकी सीमा पर जाकर अपना ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। चीनी कंपनियों का ये ठिकाना मेक्सिको है, जिसकी सीमा लंबी दूरी तक अमेरिका से मिलती है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में अमेरिका के तत्कालीन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने जब चीन के खिलाफ व्यापार युद्ध शुरू किया, तो उसके जवाब में चीन ने ये रणनीति अपनाई। इसके तहत चीनी कंपनियों ने मेक्सिको में अपना प्लांट लगा कर वहां से कपड़ा या फर्नीचर जैसे उत्पाद निर्यात करने की पहल की। अब ये कारोबार ठोस रूप ले चुका है।
वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम की एक खास रिपोर्ट के मुताबिक परंपरागत रूप से चीनी कंपनियां दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में अपने संयंत्र लगाती रही हैं। अब मेक्सिको उनका नया ठिकाना है। यहां उत्पादन करने की श्रम लागत कम है। साथ ही वे कंपनियां अपने को मेक्सिको में रजिस्टर्ड करवाती हैं, जिससे मेक्सिको के उत्पादों को अमेरिका में मिली खास कर छूट का फायदा उन्हें मिल जाता है। ये छूट मेक्सिको-अमेरिका-कनाडा की त्रिपक्षीय व्यापार संधि के तहत मिलती है।
कीर्नी की चीन शाखा के अध्यक्ष ही शियाओचिंग ने वेबसाइट निक्कई एशिया से कहा- ‘मेक्सिको में कारखाना चलाने का खर्च काबू में रहता है। साथ ही महामारी या अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध से सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटों से भी वहां कम जोखिम पैदा होता है।’
मेक्सिको के होफुसान इंडस्ट्रियल पार्क के उपाध्यक्ष वू गुआंगयु ने बताया- ‘कोविड महामारी फैलने के बाद चीनी कंपनियों ने विदेश में अपना कारखाना लगाने की रफ्तार बढ़ा दी।’ इस इंडस्ट्रियल पार्क को मेक्सिको के सांतोस घराने और चीनी निवेशकों हॉली ग्रुप और फुतोंग ग्रुप ने मिल कर विकसित किया है। 2019 के बाद 20 से ज्यादा चीनी कंपनियां यहां आकर अपने संयंत्र लगा चुकी हैं। उनमें से तकरीबन दर्जन भर 2021 की दूसरी छमाही में आईं।