उन्होंने कश्मीर के हालात पर चर्चा का सीधे जिक्र नहीं करते हुए कहा कि क्षेत्र में जटिल सुरक्षा स्थिति को देखते हुए चीन पाकिस्तान के साथ काम करने को इच्छुक है ताकि दोनों देशों (भारत और पाक) के नेतृत्व के बीच सहमति बनाई जा सके। उन्होंने जनरल की यात्रा के समय के महत्व को तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि उनकी पाकस्तान की यात्रा चीन की 2019 की अंतराष्ट्रीय सैन्य सहयोग योजना में थी और इस कार्यक्रम पर पाक और चीन परस्पर सहमत हुए थे।
गौरतलब है कि कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण करने की कोशिश कर रहा पाक अपनी कोशिशों के प्रति समर्थन पाने के लिए चीन से कहीं अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का अनुरोध कर रहा है। अनुच्छेद 370 को हटाये जाने के भारत सरकार के पांच अगस्त के फैसले के बाद पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए बीजिंग का दौरा किया था।
वहीं, पाक के कहने पर चीन ने कश्मीर मुद्दे पर 16 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक बैठक बुलाई थी। यह बैठक बंद कमरे में हुई थी। लेकिन यह बेनतीजा रही थी। बैठक में शामिल हुए 15 सदस्यीय सुरक्षा परिषद के ज्यादातर देशों ने कश्मीर मुद्दे का हल द्विपक्षीय तरीके से करने का विचार जाहिर किया था।
इस बीच, पाकिस्तान से प्राप्त खबरों के मुताबिक पाक और चीन ने रक्षा सहयोग बढ़ाने और पाकिस्तान सेना की क्षमता को बढ़ाने के लिए एक सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किये थे। हालांकि, रे ने एमओयू पर हस्ताक्षर किये जाने का जिक्र नहीं किया।