नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी में विभाजन के बाद दहल खेमे ने दहल के साथ माधव कुमार नेपाल को सह-अध्यक्ष नियुक्त किया है। दूसरे गुट का नेतृत्व प्रधानमंत्री ओली कर रहे हैं। इनमें किस खेमे को पार्टी के असली गुट के रूप में मान्यता मिलती है, यह नेपाल के निर्वाचन आयोग को तय करना है। निर्वाचन आयोग ऐसा करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। नेपाल का सुप्रीम कोर्ट सदन भंग करने के राष्ट्रपति के फैसले की संवैधानिकता पर सुनवाई शुरू कर चुका है। कोर्ट के फैसले से ही यह तय होगा कि पुराना सदन बहाल होगा या फिर नए चुनाव कराए जाएंगे। राष्ट्रपति ने नया चुनाव अगले 30 अप्रैल और 10 मई को कराने का एलान किया है।
इस बीच चीनी राजदूत की गतिविधियों पर कई हलकों में असहजता देखी गई है। कम्युनिस्ट नेताओं से लगातार उनकी मुलाकातों को नेपाल के अंदरूनी मामले में दखल माना गया है। कई कम्युनिस्ट नेता चीन से अपना वैचारिक रिश्ता मानते हैं। लेकिन एक संवैधानिक लोकतांत्रिक देश में बाहरी ताकत का इस तरह सीधा सक्रियता दिखाना असामान्य है। विपक्षी नेपाली कांग्रेस चीन के ऐसे दखल पर पहले भी एतराज करती रही है। उसके नेता अब फिर दबी जुबान में इस पर सवाल उठा रहे हैं।