पूरी दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराने वाले चीन की कुछ कमियां भी हैं। उसकी भी कुछ दुखती रग हैं जिन पर हाथ रखते ही वो तिलमिला उठता है। ऐसी ही एक दुखती रग है उसका शिनजियांग प्रांत।
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मुस्लिम बहुल आबादी वाले शिनजियांग प्रांत को लेकर चीन हमेशा से टेंशन में रहता है, उसकी बड़ी वजह है इस राज्य की उइगर मुस्लिम बहुल आबादी, जहां मुसलमान एक करोड़ से अधिक हैं। हांगकांग और तिब्बत जैसे अपने उपनिवेशों के मामले में हमेशा से ही घिरा रहने वाले चीन को डर सताता रहता है की कहीं यह मुस्लिम बहुल प्रांत उससे अलग न हो जाए।
इसलिए वहां अलगाववाद के किसी भी बीज को वह पनपने नहीं देता, चाहे विश्व उइगर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डाल्कुन ईसा को आतंकवादी घोषित करना हो या मुस्लिम बहुल आबादी पर तरह तरह के प्रतिबंध लगाना।
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हालांकि इस सबके बावजूद चीनी दमन और शोषणकारी नीतियों के खिलाफ शिनजियांग में लगातार विरोध की अवाज बुलंद होती जा रही है। शिनजियांग के कुछ ऐसे ही तथ्यों से हम आपको अवगत कराते हैं।
कई मुस्लिम देशों से लगती है शिजियांग की सीमा
चीन के पश्चिम में स्थित शिनजियांग की सीमा पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे मुस्लिम देशों से मिलती है। ऐसे में चीन को हमेशा डर सताता रहता है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान में बढ़ रही आतंकवाद की जड़ें उस तक भी न पहुंच जाए।
पिछले कुछ समय में इसका असर भी यहां देखने को मिला है जब इस्लामी कट्टरता के कई मामले यहां सामने आए हैं, हालांकि उसे चीनी दमन के विरोध स्वरूप भी देखा जाता है। असल में चीन के इस मुस्लिम बहुल हिस्से को ईस्ट तुर्किस्तान भी कहा जाता है और चीन को इसी बात से चिढ़ है।
उइगर मुसलमान भी खुद को तुर्की मूल का ही मानते हैं और तुर्क भाषा बोलते हैं। जबकि चीन लगातार इस बात का विरोध करता है, उइगर मुसलमानों हतोत्साहित करने के लिए भी वह हर संभव प्रयास करता है। पिछले कुछ सालों से तो चीन ने रमजान महीने में यहां रोजा रखने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। सरकारी नौकरियों में भी उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता। ज्यादातर मौके पर तो उन्हें इससे महरूम ही रखा जाता है।
शिजियांग में दमन की सारी सीमाएं तोड़ रहा चीन
यूं तो पूरे चीन में मुस्लिम आबादी दो करोड़ से भी ज्यादा है, लेकिन इनमें से एक करोड़ शिनजियांग में ही निवास करते हैं जो यहां की कुल आबादी का 60 फीसदी है। चीन के मूल नागरिकों की संख्या यहां 40 फीसदी के करीब है। ऐसे में चीन को हमेशा डर सताता रहता है कि कभी यहां अलग राष्ट्र की मांग जोर न पकड़ने लगे।
हालांकि उइगर मुसलमान लंबे समय से चीन के खिलाफ मूवमेंट चला रहे हैं। वर्ल्ड उइगर कांग्रेस ने तो उसके खिलाफ लंबे समय से विरोध का स्वर अंततराष्ट्रीय स्तर पर भी बुलंद कर रखा है। इसलिए मूवमेंट के नेता डोल्कुन ईसा को तो चीन ने आतंकवादी घोषित कर रखा है और उसके खिलाफ इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी करवा दिया है।
एक दौर में तो सन 1949 के दौरान तो शिनजियांग चीन से अलग भी हो गया था हालांकि जल्द ही फिर इसका चीन में विलय हो गया। शिनजियांग में उईगर और स्थानीय हान मुसलमानों के बीच लगातार टकराव की खबरें आती रहती हैं। इसके चलते कई बार यहां दंगे हो चुके हैं, साल 2008 में तो शिनजियांग में हुए दंगों में 200 से ज्यादा लोग भी मारे गए थे।
2009 में फिर दंगे हुए जिनमें 150 से ज्यादा उइगर मुसलमान मारे गए। उइगर मुसलमानों के किसी भी विरोध को चीन पूरी सख्ती से कुचल देता है। उइगर मुसलमानों को पांच वक्त की नमाज पढ़ने पर पाबंदी है, रमजान में वह रोजे नहीं रख सकते। उन्हें उनकी धार्मिक मान्यता के रूप में दाढ़ी रखने की भी मनाही है। उइगर महिलाएं बुर्का नहीं पहन सकतीं।
शिनजियांग में चीन के भारी दमन के बावजूद भी कोई देश उसके खिलाफ बोलने की हिम्मत नहीं करता। हालांकि शुरुआत में तुर्की इसका विरोध करता था, लेकिन जैसे-जैसे चीन की ताकत बढ़ती गई वैसे वैसे उसका विरोध भी ठंडा पड़ता गया। कई मौके पर पाकिस्तान ने भी शिनजियांग में चीनी दमन का विरोध किया है, खासकर बीते सालों में रोजे पर प्रतिबंध लगाने के मामलों में भी पाकिस्तान ने अपना एतराज जताया, लेकिन इसका चीन पर कभी कोई असर पड़ता नहीं दिखा।
इसकी वजह से शिनजियांग के उइगर मुसलमानों को अमानवीय प्रतिबंधों के तले जीने को मजबूर होना पड़ रहा है। चीन के इसी दमन से आजिज आकर अब शिनजियांग के युवाओं ने हिंसा का रास्ता अख्तियार कर लिया है। इनमें से कुछ युवाओं ने तो दुर्दांत आतंकी संगठन आईएस का दामन भी थाम लिया। सोशल मीडिया पर भी लगातार इस तरह की खबरें आ रही हैं, जिसकी वजह से चीन की चिंताएं बढ़ी हुई हैं।