चीन के कई अधिकारी और विशेषज्ञ इस बारे में टिप्पणी करते आए हैं। गौरतलब है कि भारत ओबोर में शामिल होने में इच्छुक नहीं है। इसके प्रोग्राम के तहत चीन को रोड, रेल, और पानी के रास्त दुनिया भर से जोड़ा जाएगा।
चीन के विशेषज्ञ के अनुसार भारत ओबोर प्रोग्राम को लेकर एक ही पक्ष से सोच रहा है। शंघाई विश्वविद्यालय के लिन मिन्वांग ने कहा रूस भी इस परियोजन में दिलचस्पी ले रहा है, तो भारत को क्या दिक्कत है। मिन्वांग ने कहा, "भारत को सुन कर शर्म आए कि रूस भी ओबोर में दिलचस्पी दिखा रहा है। इसके बाद संभव है कि रूस मंगोलिया के रास्ते चीन के साथ आर्थिक कॉरिडोर का निर्माण करे। रूस के साथ ईरान भी ओबोर से जुड़ना चाहता है। सिर्फ भारत को ही इससे दिक्कत है।"
हालांकि रूस ने इस मुद्दे पर कोई साफ और स्पष्ट बयान नहीं दिया है। चीन ने उम्मीद जताई है कि करीब एशिया और यूरोप से 20 देश इस कॉन्फ्रेंस का हिस्सा बनेंगे। भारत की भागीदारी से दक्षिण एशियाई देशों का रुझान भी इसमें बढ़ेगा।