कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा है कि धारणाओं के विपरीत चीन ने एक दशक पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद के लिए उनकी उम्मीदवारी का विरोध नहीं किया था। बल्कि हकीकत यह है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पहले चुनाव में चीन ने उनके समर्थन में वोट किया था।
हांगकांग के एक अखबार दक्षिण चीन मॉर्निंग पोस्ट में छपे लेख में पूर्व राजनयिक थरूर ने कहा कि दस साल पहले 2006 में वह संयुक्त राष्ट्र महासचिव बनने की होड़ में दूसरे नंबर पर थे। लेकिन इस होड़ में वह दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री बान की मून से पिछड़ गए। हालांकि इससे चीन का कोई लेना-देना नहीं है। थरूर ने कहा कि उनके महासचिव नहीं बनने के लिए सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों में से किसी को भी दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
परंपरागत रूप से महासचिव का पद सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों को नहीं मिलता है। यह पद छोटे देशों की उम्मीदवारी के लिए है। हालांकि अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस और चीन सुरक्षा परिषद के पांच सदस्यों को किसी भी उम्मीदवारी को रोकने का वीटो प्राप्त है। लेकिन तब चीन ने उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया था।