डोकलाम सीमा विवाद को लेकर चीन को एक के बाद एक करारा झटका लगने का सिलसिला अभी जारी है। अमेरिका और इजरायल के बाद रूस ने भी डोकलाम विवाद पर चीन के रुख की पैरवी करने से इनकार कर दिया है। रूस के राजदूत ने डोकलाम मुद्दे पर चीनी एजेंडे को अपनाने से इनकार करते हुए यह साफ कर दिया कि मॉस्को इसे लेकर न्यूट्रल रुख अपनाएगा ।
डोकलाम समाधान से ठीक पहले आया था बयान
डोकलाम विवाद पर पेइचिंग में रूस के राजदूत एंद्रे जिनिसोव ने कहा था कि भारत और चीन के बॉर्डर पर इन दिनों जिस तरह के हालात हैं, उससे रूस भी काफी दुखी है। रूस की तरफ से यह बयान 28 अगस्त को डोकलाम विवाद का समाधान होने से ठीक पहले आया था।
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रूस के दबाव के बाद पीछे हटा चीन
दरअसल डोकलाम विवाद को लेकर मॉस्को के रुख का भारत और रूस के रिश्तों पर भी असर पड़ सकता था, ऐसे में रुस का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। पिछले दिनों ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि डोकलाम विवाद पर चीन रूस के दबाव के बाद पीछे हटा है।
ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्राजील और साउथ अफ्रीका के लीडर्स के साथ-साथ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे।
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आपको बता दें कि डोकलाम सीमा विवाद के बाद चीन को उस वक्त एक और करारा झटका लगा था, जब ब्रिक्स सम्मेलन को लेकर चीन को भारत के सामने झुकना पड़ा। भारत के कड़े विरोध के बाद ब्रिक्स समूह के विस्तार की योजना चीन को मजबूरन छोड़नी पड़ी थी।