गोखले ने बताया, ‘मोदी-जिनपिंग ने सीमा विवाद प्रबंधन को प्रभावी बनाने और सीमा क्षेत्रों में अप्रिय हालात से बचने के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए।’ दोनों नेताओं ने विश्वास बहाली के लिए अपनी सेनाओं को साझा व बराबरी की सुरक्षा के सिद्धांत, सीमा क्षेत्रों में टकराव टालने के लिए मौजूदा संस्थागत तंत्र व सूचनाएं साझा करने के तंत्र को मजबूत करने जैसे मानकों को लागू करने के निर्देश दिए।
मसूद अजहर पर नहीं हुई कोई बात
गोखले के मुताबिक, मोदी-जिनपिंग ने माना कि दोनों देशों के क्षेत्रीय व वैश्विक हित एक-दूसरे से जुड़े हैं। मजबूत रणनीतिक संवाद से संबंध मजबूत होंगे और दोनों देश क्षेत्रीय व वैश्विक स्थायित्व में सहयोग कर पाएंगे।
दोनों पक्षों ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। हालांकि, दोनों ओर से जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर सीधे कोई बात नहीं हुई। गौरतलब है कि चीन संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किए जाने पर बार-बार अड़ंगा डाल रहा है।
कारोबार संतुलन पर रहा मोदी का जोर
मोदी-जिनपिंग ने अनौपचारिक बातचीत में माना कि दोनों देशों के बीच संतुलित और दीर्घकालिक कारोबार होना चाहिए। इस दौरान मोदी ने कारोबार में संतुलन पर जोर दिया। उन्होंने जिनपिंग को भारत से चीन को कृषि उत्पादों व दवाइयों के निर्यात की संभावनाओं के बारे में बताया। दोनों के बीच पर्यावरणीय बदलावों, दीर्घकालिक विकास और खाद्य सुरक्षा पर भी बात हुई।