चीन का गैंक्सी डॉन्ग गांव जहां सभी कुंग-फू में माहिर हैं
कुंग-फू... यह नाम सुनते ही आपको चीन की फिल्मों का ध्यान आ जाएगा। यूं तो पूरा चीन कुंग-फू के लिए मशहूर है। लेकिन चीन में एक गांव ऐसा है जहां हर कोई कुंग-फू में माहिर है। मध्य चीन के तियांजहू के ग्रामीण गांव में हर कोई बिना नागा के हर रोज मार्शल आर्ट का अभ्यास करता है।
इस गांव में नौकरीपेशा हो या रेहड़ी लगाने वाला सब कुंग-फू में निपुण हैं। यहां विभिन्न कुंग फू शैलियों को सिखाया और इस्तेमाल किया जाता है और लोग अपने कौशल को बेहतर बनाने के लिए एक-दूसरे से लड़ते हैं। कुंग-फू की असामान्य परंपरा ने गांव को प्रसिद्ध बना दिया है।
चीन के गुइज़हौ प्रांत में यह गांव है गैंक्सी डॉन्ग। यह डॉन्ग लोगों का गांव है जो चीन में 56 मान्यता प्राप्त जातीय अल्पसंख्यकों में से एक हैं। 150 साल पहले एक शाओलिन भिक्षु के यहां आने के बाद यह परंपरा शुरू हुई। गैंक्सी डॉन्ग की आबादी करीब 8000 है। इस गांव का कुंग-फू इतना प्रसिद्ध है कि इसे कुंग-फू गांव कहा जाने लगा है।
ऐसा कहा जाता है कि 150 साल पहले में शाओलिन भिक्षु तांग लाओशुन के यहां आने के बाद यहां के लोगों ने कुंग-फू का अभ्यास करना शुरू कर दिया था। उस दौरान राजा की सेनाओं से बचने के लिए तांग को शाओलिन टेंपल में छिपना पड़ा।
गैंक्सी के मशहूर कुंग-फू मास्टर 88 वर्षीय झोंग मोलिन का कहना है कि तांग को पहले स्थानीय लोगों ने काफी परेशान किया और उनकी जान लेने की कोशिश की। लेकिन अपने मार्शल आर्ट से उन्होंने लोगों को न सिर्फ हराया बल्कि उन्हें हैरान भी कर दिया।
एक बार तांग ने उन पर फेंके जाने वाले पत्थरों को पकड़ने के लिए अपनी चॉपस्टिक्स की का इस्तेमाल किया। निहत्थे तांग ने गांव के सबसे अच्छे कुंग फू योद्धा को भी हराया जो लंबी छड़ी लेकर आया था।
तांग की काबिलियत से प्रभावित होकर गैंक्सी के निवासियों ने उनसे कुंग-फू सीखने का फैसला किया और परंपरा आज तक चली आ रही है। झोंग छठे पीढ़ी के कुंग फू वंशज हैं और गांव में कुंग-फू की कक्षा चलाते हैं। वह वहां के शाओलिन टेंपल में क्लास लेते हैं। हालांकि लोग अपने घरों, अपने खेत या सड़क के स्टॉल पर भी कुंग-फू का अभ्यास करते देखे जा सकते हैं।