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वुहान में दूर हुईं भारत-चीन के बीच गलतफहमियां, सिर्फ सीमा मुद्दे को लेकर बंटी है राय

Fri, 16 Nov 2018 09:46 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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पीएम मोदी, जिनपिंग
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भारत का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच वुहान शिखर वार्ता में दोनों देशों की गलतफहमियां दूर हुई हैं, जिससे दोनों देश वैश्वीकरण जैसे कई मुद्दों पर मिलकर काम कर सकेंगे। चीन में भारत के राजदूत गौतम बंबावले ने बताया कि वुहान सम्मेलन में दोनों नेताओं ने करीब 10 घंटे तक बातचीत की। दोनों नेता इस तरह की अनौपचारिक बैठक करना चाहते थे, ताकि अधिकतम समय एक-दूसरे से बात कर सकें।

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इस महीने सेवानिवृत्त हो रहे बंबावले की जगह म्यामांर में भारतीय राजदूत विक्रम मिश्री लेंगे। बंबावले ने बृहस्पतिवार को चीन के सरकारी टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मुझे लगता है कि बहुत सी ऐसी चीजें हैं, जो भारत और चीन मिलकर कर सकते हैं। दोनों देश बहुपक्षवाद के लाभार्थी हैं और हम चीन की तरह वैश्वीकरण का समर्थन करते हैं। दोनाें देश मानते हैं कि वे विकासशील देश हैं, जिन्हें करीब 2.4 अरब लोगों का जीवनस्तर सुधारना है। 

बंबावले ने कहा, कुछ ही मुद्दे हैं, जिन पर दोनों देशों की भिन्न सोच है। दोनों देश जिस मुद्दे पर बंटे हैं, वह है सीमा का अनसुलझा सवाल। सीमा समस्या के हल पर काम करने के साथ ही हमारे बीच सीमाओं पर शांति और सामंजस्य बनाए रखने पर सहमति बनी है और पिछले 30 वर्षों में हम इसमें सफल रहे हैं।’ उन्होंने दोनों देशों के बीच बढ़ रहे सहयोग के लिए अफगान राजनयिकों को मिलकर ट्रेनिंग देने के हालिया फैसले का जिक्र भी किया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में मिलकर काम करने का निर्णय भी मोदी और शी ने वुहान वार्ता में ही लिया था। 
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व्यापारिक भविष्य भी है जगमग
भारत-चीन व्यापार और तेजी से बढ़ रहे निवेश पर बंबावले ने कहा कि मैं सहमत हूं कि भारत और चीन के बीच ना केवल व्यापार बल्कि निवेश भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि चीन की बहुत सारी कंपनियों ने भारत में निवेश शुरू कर दिया है। हुआवे मोबाइल कंपनी ने भारत में बड़ा रिसर्च बेस बनाया है, जिससे तकरीबन 6000 भारतीय इंजीनियरों को रोजगार मिला है।

सीमा पर दोनों में ऐसा है विवाद
भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को लेकर विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, जबकि भारत अक्साई चीन पर दावा जताता है। चीन ने 1962 युद्ध के दौरान इस क्षेत्र को हथिया लिया था। 
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27-28 अप्रैल को हुई थी दोनों देशों की वुहान शिखर वार्ता

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