भारत द्वारा दोकलम इलाके में सैन्य मौजूदगी बढ़ने से चीन में एक बार फिर तीखी प्रतिक्रिया हुई है। चीन के सरकारी मुखपत्र के मुताबिक भारत का सैन्य वापसी को खारिज करने का कदम मोदी सरकार के चीन से व्यापक रणनीतिक टकराव का इरादा जताता है, जो सितंबर में फुजियन प्रांत स्थित शियामन ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर अपरिहार्य रूप से असर डालेगी।
चीनी कम्युनिस्ट सरकार के अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने आशंका जताई कि चीन को ब्लैकमेल कर भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को बाधित कर सकता है।
‘ग्लोबल टाइम्स’ के मुताबिक भारत दोकलम से सेना की वापसी में देरी कर अपने रणनीतिक लक्ष्य साध रहा है। उसने माना कि हाल के वर्षों में भारत ने ब्रिक्स के आंतरिक सहयोग को प्रोत्साहित करने और वैश्विक आर्थिक सुधार को प्रभावित किया है।
अखबार ने डर जताया कि भारत किसी भी तरह से ब्रिक्स सम्मेलन को कमजोर कर सकता है। हालांकि यह भी कहा कि चीन की तुलना में भारत को ब्रिक्स की अधिक जरूरत है, क्योंकि ब्रिक्स ने भारत को एक वैश्विक मंच दिया है।
अखबार ने यह भी माना कि भारत, ब्रिक्स के माध्यम से रूस के साथ अपने रिश्तों को बनाए रखने का भी माद्दा रखता है। उसने स्पष्ट लिखा कि ब्रिक्स सम्मेलन उभरते हुए देशों का सिर्फ एक मंच है, जिसका वास्तविक परिणामों के मुकाबले, भू-राजनीतिक दृष्टि से प्रतीकात्मक महत्व अधिक है।
चीन के सरकारी अखबार ने अपनी बौखलाहट निकालते हुए लिखा कि - ‘चीन की वन बेल्ट, वन रोड पहल में बाधा पहुंचाकर भारत दक्षिण एशिया व हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक असमानता को उल्टा करते हुए अपनी पकड़ को कमजोर कर सकता है।’
अखबार के मुताबिक - ‘भारतीय नेतृत्व को लगता है कि देश खुशहाल है और उसे अमेरिका व जापान का समर्थन भी हासिल है इसलिए वह अपने रुख पर अड़ा है।’ उसने लिखा है कि - ‘भारत शायद सोचता है कि चीन का किसी भी अन्य देश से सशस्त्र संघर्ष उसके शांतिपूर्ण विकास की रणनीति और प्रतिष्ठा को खराब करेगा या ब्रिक्स सम्मेलन के कारण चीनी सेना भारतीय टुकड़ी से संघर्ष नहीं करेगी। इस तरह वह सीमा पर सेना बढ़ाकर चीन को ब्लेकमेल करने का प्रयास कर सकता है।’