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चीन में राष्ट्रपति के विचारों को मिल रहा बढ़ावा, पाठ्यक्रम में शामिल हुए शी जिनपिंग के विचार

Sat, 23 Jun 2018 09:50 AM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर अजाल
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किसी देश के नेता या शासक के विचारों को वहां के पाठ्यक्रमों में शामिल करना एक तरह से छात्रों का ब्रेन वॉश माना जाता है। कहा जाता है कि ऐसा करने से उस देश के नेताओं को वहां की आने वाली पीढ़ी अपना भगवान मानने लगती है। अब तक तो हम सुनते आए थे कि ये सब उत्तर कोरिया में ही होता है, जहां के इतिहास की पुस्तकों में तानाशाहों की वीर गाथाओं का वर्णन होता है। लेकिन अब ऐसा ही कुछ चीन में भी होने लगा है।

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चीनी विश्वविद्याल के पाठ्यक्रमों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के विचारों को शामिल किया जा रहा है। देश में माओ युग के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है कि किसी नेता को अकादमिक रूप से इतना महत्व मिल रहा है। यह चीनी विश्वविद्यालय इंटरैक्टिव ऑनलाइन कोर्स, उदार फंडिंग और शोध संस्थानों से लेस है। अपने पुराने पाठ्यक्रमों में जिनपिंग के विचारों को शामिल कर यह उन्हें देश और विश्व में बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रहा है।

चीन में स्थापित अन्य विश्वविद्याल भी इस राह में कार्य कर रहे हैं। बीते साल अक्तूबर से इन्होंने "शी थॉट" और "शी के विचार" को अपने पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया है। चीनी व्यवस्था में जिनपिंग की पकड़ को और भी ज्यादा मजबूत करने के लिए जिनपिंग के दो साल के कार्यकाल की अनिवार्यता को खत्म किया जा चुका है। इसके बाद अब वह आजीवन सत्ता में बने रह सकते हैं।  
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जिनपिंग के विचारों की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि पिछले साल अक्तूबर से लेकर अब तक विश्वविद्यालयों, सरकार और मंत्रालयों में तकरीबन 30 शी थॉट रिसर्च इंस्टाट्यूट की स्थापना हो चुकी है। अब यहां की सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के हर निवासी के दिमाग में जिनपिंग की विचारधारा के लिए जगह बनाना ही है।

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