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चीन के लिए असंभव है 2020 तक देश की गरीबी खत्म करना

Thu, 02 Nov 2017 02:41 AM IST
न्यूयॉर्क टाइम्स न्यूज सर्विस
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china flag
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 चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को सबसे शक्तिशाली नेता की कमान मिलते ही उन्होंने 2020 तक देश से गरीबी को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प लिया, लेकिन उनके लिए ऐसा कर पाना बेहद ही मुश्किल है या यूं कह सकते हैं कि लगभग असंभव है। चीन भले ही दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का सपना देख रहा है लेकिन वहां का आर्थिक बूम देश के विशाल उत्तर-पूर्वी हिस्से समेत कई प्रांतों से कोसों दूर है।
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न्यूयॉर्क टाइम्स के जेवियर सी. हर्नांडेज ने चीन की चकाचौंध भरे कुछेक शहरों से दूर देश के कई इलाकों में जाकर हालातों पर विस्तृत रिपोर्टिंग की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक चीन की राजधानी बीजिंग से मात्र छह घंटे की ड्राइव पर बसे चशान नामक गांव में पहुंचते ही चीन के आर्थिक विकास की पोल खुल जाती है। यहां सड़कें ऊबड़-खाबड़ और धूल भरी हैं यहां न हाई स्पीड ट्रेनों का नेटवर्क है और न गगनचुंबी इमारतें। 

हालात ऐसे हैं कि इस इलाके के लोग एक वक्त का चावल, ब्रेड और पानी तक मुश्किल से नसीब हो रहा है। चशान गांव में चावल और शराब के सहारे जीवन गुजार रहे  72 वर्षीय रईस शख्स ली-झि ने कहा, इस देश में हमारी किसी को परवाह नहीं है। सात दशक बाद चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के बेहद ताकतवर नेता शी जिनपिंग ने देश को भले ही 2020 तक गरीबी मुक्त करने का संकल्प लिया है लेकिन व्यावहारिक धरातल पर यह दिवास्वप्न जैसा दिखाई देता है। देश में कुल 4.3 करोड़ लोग आज भी प्रतिदिन 95 सेंट से कम कमा पाते हैं जबकि आधिकारिक आंकड़ों के हिसाब से चीन के 10 करोड़ लोग गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं।
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सुपरपावर चीन की कड़वी हकीकत
शी जिनपिंग के  बुलंद दृष्टिकोण की कड़वी हकीकत यह है कि इसका चीन के ग्रामीण इलाकों तक पहुंचना एक बहुत बड़ी चुनौती है, जिसका अगले तीन साल में पूरा हो पाना संदेहास्पद है। चीन के अधिकांश गांवों से युवा लोग बुजुर्गों को उनके हाल पर छोड़कर पलायन कर चुके हैं। इस इलाकों में शिक्षा नहीं के बराबर है, स्वास्थ्य व समाज सेवा अंधेरे में हैं। चीनी अर्थव्यवस्था में गरीबी के हालात इसे दुनिया में सुपरपावर बनाने के बजाय महज एक विकासशील देश की श्रेणी में ही रखते हैं।

गरीबों की आबादी एक बड़ी चुनौती
लंदन स्थित किंग्स कॉलेज में चीनी मामलों के विशेषज्ञ कैरी ब्राउन ने कहा कि चीन में सभी लोगों के जीवन यापन के लिए सामान्य जरूरतें पूरी करना समाजवाद का हिस्सा है लेकिन चिंता इस बात की है कि कम्युनिस्ट पार्टी ने अरबपति और मध्यम वर्ग तो खड़ा कर दिया है लेकिन अभी भी यहां गरीब लोगों की आबादी एक बड़ी चुनौती है। चीन में एक तरफ 50 करोड़ की आबादी मध्यमवर्ग के रूप में उभरी है तो दूसरी तरफ चीन की करीब 40 फीसदी जनसंख्या का गुजारा प्रतिदिन 5.50 सेंट से भी कम में होता है।
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