राष्ट्रपति शी जिनपिंग को दूसरा कार्यकाल मिलने और उनकी विचारधारा को कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा अपने संविधान में शामिल करने के बाद चीन के सरकारी मीडिया ने अपने तेवर दिखाना शुरू कर दिया है।
उसने लिखा है कि चीनी राष्ट्रपति के पास अब चीन को दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना मुख्य काम है। इसके लिए भारत को चाहिए कि वह भी पाकिस्तान की तरह ‘बेल्ट एंड रोड’ पर चीन का समर्थन करे अन्यथा दक्षिण एशिया में उसके अलग-थलग पड़ने की संभावना बढ़ जाएगी।
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‘ग्लोबल टाइम्स’ ने शी का स्वागत करते हुए दुनिया को चीन की बढ़ती ताकत का हवाला देते हुए भारत को आइना दिखाने की कोशिश की है। उसने लिखा है कि भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती चीन का अब और अधिक ताकतवर बनकर उभरना रहेगी। ऐसे में उसे फैसला करना होगा कि वह चीन के नेतृत्व में होने वाले विकास का हिस्सा बनेगा या जापान, अमेरिका और आसियान देशों के साथ मिलकर विकल्प खड़े करने की कोशिश करेगा।
हालांकि अखबार ने अपनी भाषा पर नियंत्रण साधते हुए लिखा कि भारत अधिकांश मामलों में चीन के साथ सहयोग करता रहा है और चीन भी भारत में पूंजी निवेश करता है जो भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
सरकारी अखबार ने चीन के अर्थशास्त्री और थिंकटैंक प्रमुख चाइ-ओ-छिन के हवाले से भारत को आइना दिखाते हुए लिखा कि वर्तमान में चीन 11 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था है जिसे 2021-23 तक 19 खरब डॉलर के स्तर तक लाने का सपना शी जिनपिंग का है। ऐसे में भारत को विकास के लिए जो निवेश चाहिए वह चीन से मिल सकता है, जबकि वर्तमान में अन्य देश यहां निवेश नहीं कर रहे हैं।
चाई ने कहा कि भारत को एक करोड़ से भी अधिक नौकरियों की तलाश है, ऐसे में चीन उसकी निवेश संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकता है। यही नहीं जर्मनी को छोड़कर यूरोप भी ऐतिहासिक पतन की तरफ बढ़ रहा है, ऐसे में भारत के पास रास्ते बहुत कम हैं। जबकि चीन पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का केंद्र बन रहा है।