चीनी शोधकर्ताओं ने कैंसर कोशिकाओं को मात देने वाले हैवी-आयन मेडिकल ऐक्सेलरैटर का क्लिनिकल परीक्षण शुरू कर दिया है। एक अधिकारी ने रविवार को बताया कि शोधकर्ताओं ने कहा कि इस महीने ऐक्सेलरैटर का प्रयोग उत्तर-पश्चिम गांसू प्रांत में कैंसर रोगियों के लिए शुरू किया गया है।
उन्होंने कहा कि कैंसर कोशिकाओं को मात देने वाले हैवी-आयन ऐक्सेलरैटर एनर्जी इलेक्ट्रॉन्स के साथ उन पर हमला कर सकते हैं। चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंस के ‘इंस्टिट्यूट ऑफ मॉडर्न फिजिक्स’ के प्रमुख जिओ गुओकिंग ने कहा कि इसे व्यापक रूप से ट्यूमर से लड़ने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। उन्होंने कहा कि हैवी-आयन मेडिकल ऐक्सेलरैटर को पुरानी थेरेपी की तुलना में कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए अधिक प्रभावी माना जा रहा है।
शोधकर्ताओं की मानें तो इसकी उपचार अवधि कम है और यह थेरेपी कैंसर की कोशिकाओं को अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित कर सकती है। इसे उत्तर पश्चिमी गांसू प्रांत की राजधानी लैन्जो के संस्थान ने 2015 में विकसित किया गया था। सिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक, ऐक्सेलरैटर के क्लिनिकल परीक्षण के से गुजरने में दो साल लग गए। इसका रजिस्ट्रेशन और परीक्षण अप्रैल में पूरा हो गया था और अब इसका क्लिनिकल परीक्षण शुरू हुआ है। इनमें सिर, गर्दन, छाती, पेट और शरीर के अन्य अंगों के कैंसर पर परीक्षण किया जा रहा है। वर्तमान में चीन में ऐसे अस्पतालों की संख्या कम हैं जो कि हैवी-आयन कैंसर का इलाज करते हैं।
क्या कहती है रिपोर्ट
‘नेशनल कैंसर सेंटर’ में प्रकाशित 2017 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल दुनिया में बढ़ने वाले कैंसर के मरीजों में चीन की हिस्सेदारी 25 फीसदी है। चीन में हर साल इस घातक बीमारी से 10 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इसमें फेफड़े, स्तन और पेट के कैंसर सबसे सामान्य होते हैं।
‘जर्नल ईएमबीओ रिपोर्ट्स’ में प्रकाशित एक शोध में पाया गया है मौजूदा कीमोथेरेपी की दवाएं कैंसर के इलाज में तब ज्यादा प्रभावी पाई जाती हैं जब कैंसर और ट्यूमर तक रक्त की आपूर्ति रोकने का इलाज एक साथ किया जाए। यह कैंसर के मरीजों को इस घातक बीमारी से बचाने में एक असरदार तरीका है।