डोकलाम या डोका ला में असल में हुआ क्या था? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनल्ड ट्रंप के शिखर सम्मेलन से पहले इस गतिरोध का होना एक संयोग मात्र है या फिर यह चीन द्वारा आयोजित ओबीओआर कॉन्फ्रेंस में भारत के हिस्सा न लेने का दुष्परिणाम है?
कई अनुमान लगाए जा रहे हैं मगर दोनों सरकारों के अलावा बहुत कम लोगों को मालूम है कि मौजूदा गतिरोध के पीछे की हक़ीक़त क्या है। भारत की जनता को लगता है कि चीन तनाव को बढ़ा रहा है। चीन के लोगों को लगता है कि यह काम भारत कर रहा है।
तेज रफ्तार वाले संचार साधनों के इस दौर में जो समझा जाता है, वही सच मान लिया जाता है। मगर दोनों सेनाओं के बंद दरवाज़ों के नीचे से कुछ रोशनी आ रही है। सिक्किम और भूटान के बीच चुंबी घाटी की सबसे दूर की चोटी पर चीन एक सड़क बना रहा है जो डोकलाम के मैदान के नाम से पहचाने जाने वाले इलाके तक जाएगी.
असल विवाद चीन और भूटान में है
इस इलाके पर चीन और भूटान दोनों का दावा है. तिब्बत और भूटान के याक और चरवाहे इस मैदान को इस्तेमाल करते हैं। भारतीय सेना को लगता है कि यहां सड़क बनने पर चीन डोकलाम में तोपें तैनात कर सकता है। इससे भारत को उस इलाके में बड़ा ख़तरा हो जाएगा जो उसके के लिए रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है और संवेदनशील है।
उत्तर पूर्व भारत के लिए रास्ता यहीं से है। यह पतला और लंबा-सा दिखने वाला इलाका भारत में 'चिकेन्स नेक' या 'मुर्गे की गर्दन' के नाम से पहचाना जाता है। नक्शे पर चुंबी घाटी ऐसे खंजर-सी नज़र आती है जो न सिर्फ़ सिक्किम और भूटान को अलग करती है बल्कि असम और बाकी पूर्वोत्तर को भी भारत से अलग करती है।
मित्रता संधि
ठीक-ठीक कहें तो यह माना जा सकता है कि ताज़ा विवाद चीन और भूटान के बीच है। भूटान 1910 में ब्रिटिश इंडिया का संरक्षित देश बन गया था। एक संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद इसके विदेश और रक्षा मामलों का संचालन ब्रिटिश इंडिया हुकूमत के पास आ गया था। भूटान उन शुरुआती देशों में से एक है जिन्होंने 1947 में आज़ादी मिलने पर भारत को राष्ट्र के तौर पर मान्यता दी थी। तभी से दोनों देशों के रिश्ते काफ़ी क़रीबी रहे हैं।
जब 1950 में चीन ने तिब्बत को अपने में मिलाया, भारत और भूटान के रिश्ते और गहरे हो गए। चीन का भारत और भूटान से सीमा को लेकर विवाद चला आ रहा है। अगस्त 1949 में भारत और भूटान के बीच 'ट्रीटी ऑफ फ्रेंडशिप' या 'मित्रता संधि' हुई थी जिसमें भूटान ने अपनी विदेश नीति में भारत से 'मार्गदर्शन' लेने की सहमति दी थी। यह भी तय हुआ था कि रक्षा और विदेश मामलों में दोनों देश एक-दूसरे से विमर्श करेंगे।