आर्थिक मुश्किलों के जरिए चीन दक्षिणी एशियाई देशों को कमजोर तो कर रहा है साथ ही वहां अपने पैर भी जमाए जा रहा है। दरअसल, चीन के बड़े प्रोजेक्ट 'वन बेल्ट वन रोड' (ओआरओबी) की वजह से ये हालात बन रहे हैं। करीब 50 अरब डॉलर की लागत के इस प्रोजेक्ट के जरिए चीन जमीन और समुद्र के रास्ते दक्षिण पूर्व एशिया-मध्य एशिया से यूरोप तक पहुंच जाएगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रीलंका और पाकिस्तान चीन के कर्जदाताओं की मार झेल रहे हैं। चीन के कर्जदाता श्रीलंका में प्रोजेक्ट के दम पर वहां मोटा ब्याज वसूल रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि मई में होने वाली इंटरनेशनल मीटिंग में इस प्रोजेक्ट को औपचारिक हरी झंडी मिल सकती है। इकनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक इस मीटिंग में 28 देशा आएंगे, जिसमें श्रीलंका भी शामिल है।
श्रीलंका के लिए इससे चिंता बढ़ सकती है क्योंकि चीन के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने से पहले ही वो भारी कर्जे में डूबा हुआ है। चीन ने श्रीलंका में इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए भारी कर्ज दिया है। बताया जा रहा है कि श्रीलंका पर करीब 65 अरब डॉलर का कर्ज और इसमें से चीन ने उसे 8 अरब डॉलर दिया हुआ है। ऐसे में श्रीलंका आवाज उठाने में कतरा सकता है, लेकिन श्रीलंका को वित्तिय नुकसान हो रहा है।
चीन के साथ श्रीलंका के आर्थिक सहयोग पर एक्सपर्ट्स ने चिंता जताई है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन यहां बड़े प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रहा है। भले ही इससे जीडीपी बढ़ेगी, लेकिन देश एक ऐसे कर्जे में डूबेगा जिसे चुकाना काफी भारी होगा।वर्ल्ड बैंक का अनुमान है कि श्रीलंका का GDP 2016 में 3.9 पर्सेंट से बढ़कर 2017 में लगभग 5 पर्सेंट पर पहुंच सकता है।
दूसरी ओर आर्थिक हालातों का सामना कर रहा पाकिस्तान पर 50 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट को सपोर्ट करना भारी पड़ रहा है। पाकिस्तान की आर्थिक हालात काफी खराब है और इस वजह से चीन इन प्रोजेक्ट्स पर अपना मालिकाना हक वहां जमा सकता है। अब इसका बड़ा नुकसान भारत को भी है, क्योंकि चीन के पैर इन देशों में जम जाएंगे और भारत की सुरक्षा पर इसका असर पड़ेगा।