दोकलम को लेकर चीन ने फिर से अड़ंगेबाजी शुरू कर दी है। उसने एकबार फिर दावा किया है कि दोकलम चीन का भूभाग है। उसने कहा है कि यह इलाका उसकी संप्रभुता में आता है जहां वह निर्माण कार्य कर रहा है।
इलाके में उपग्रह तस्वीर में दिख रही दोनों तरफ की मोर्चेबंदी को लेकर पूछे गए सवाल पर
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा कि दोकलम चीनी भूभाग है और चीन उस इलाके में अपने प्रतिष्ठान बना रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा तंत्र के जरिये इस मसले पर मतभेदों को सुलझाया जा सकता है।
चुनयिंग ‘ग्लोबल टाइम्स’ में छपे चीन में भारतीय राजदूत गौतम बंबावले के एक साक्षात्कार पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही थीं। भारतीय राजदूत ने अपने साक्षात्कार में कहा था कि तीन हजार 488 किलोमीटर की सीमा के संवेदनशील क्षेत्रों में यथा स्थिति कायम रखते हुए कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
चीनी प्रवक्ता ने साल 1890 में ब्रिटेन और चीन के बीच हुई संधि का हवाला देते हुए कहा कि चीन-भारत सीमा का सिक्किम क्षेत्र इस संधि से सीमांकित है जो चीन के न्यायक्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि चीन ने हमेशा से दोकलम समेत अपने सीमावर्ती इलाकों में संप्रभुता को बरकरार रखा है।
शांतिपूर्ण तरीके से देखे जाने चाहिए सीमा संबंधी मसले
चुनयिंग ने कहा कि हमने भारतीय राजदूत के बयान पर ध्यान दिया है। मैं कहना चाहती हूं कि दोनों देशों को सीमा संबंधी मसलों को शांतिपूर्ण तरीके से देखना चाहिए और सीमा संबंधी मौजूदा तंत्र के जरिए ही इनका समाधान करना चाहिए ताकि हम मतभेदों के समाधान के लिए अनुकूल माहौल बना सकें।