तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु करमापा के अरुणाचल प्रदेश दौरे पर चीन ने सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए सोमवार उम्मीद जताई कि नई दिल्ली ऐसी कोई भी कार्रवाई नहीं करेगा जिससे सीमा विवाद जटिल बन जाए।
17वें ग्यालवांग करमापा ओग्येन त्रिनले दोरजी ने पिछले हफ्ते अरुणाचल प्रदेश का दौरा किया था, जिसे चीन दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है। करमापा के दौरे के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लु कांग ने कहा कि चीन-भारत के पूर्वी हिस्से पर चीन का रुख स्पष्ट और स्थिर है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत संबंधित सहमति का पालन करेगा और ऐसी किसी कार्रवाई से दूर रहेगा जो सीमा विवाद को जटिल बनाती हो। कांग ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने और द्विपक्षीय संबंधों में मजबूती ही दोनों देशों के हित में है।
यह पूछने पर कि क्या चीन ने इस बारे में भारत से कोई विरोध जताया है तो उन्होंने कहा कि चीन और भारत ‘इस पर नियमित संवाद’ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जहां तक सीमा का सवाल है तो भारतीय पक्ष इस पर चीन के दृढ़ रुख से परिचित है।
17वें करमापा ने अरुणाचल प्रदेश के अपने पहले दौरे में पश्चिम कामेंग जिले का दौरा किया था। साथ ही उन्होंने कालाकटांग जाने से पहले तांजीगांग के ग्यूतो मठ में तिब्बतियों को उपदेश दिया था।