पाकिस्तान में वास्तविक सत्ता का केंद्र सेना के होने की बात से पाकिस्तान जितना चाहे इनकार कर ले मगर चीन के इस कदम से एक बार फिर यह सच्चाई दुनिया के सामने आ गई है।
दरअसल चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत बनने वाली योजनाओं को लेकर चीन चाहता है कि उनकी गारंटी पाकिस्तानी सेना ले। कुछ दिन पहले ही चीन ने इन योजनाओं के लिए पाक को जारी किए जाने वाले फंड को भ्रष्टाचार का हवाला देकर रोक दिया था।
दक्षिण एशियाई अध्ययन के लिए यूरोपीय फाउंडेशन (ईएफएसएएस) के वैश्विक चिंतकों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नए दिशानिर्देशों के तहत अरबों डॉलर की चीनी योजना सीपीईसी के फंड को पाकिस्तानी सेना की बड़ी भागीदारी के बाद ही जारी करेगा।
पाकिस्तान में बनने वाली तीन बड़ी सड़क योजनाओं की फंडिंग 20 नवंबर को संयुक्त कार्यकारी समूह (जेडब्ल्यूजी) में जारी होने की उम्मीद थी। मगर अचानक पाकिस्तान को बताया गया कि फंड जारी करने की मौजूदा प्रक्रियाओं को रोक दिया गया है और नए दिशानिर्देशों में फंड जारी करने की नई प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।
तीन बड़ी सड़क परियोजनाओं की फंडिंग को रोकने के लिए जहां चीनी सरकार ने बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को वजह बताया था वहीं ईएफएसएएस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन इन योजनाओं की जिम्मेदारी पाकिस्तानी सेना को देना चाहता है जो कि वहां सत्ता का वास्तविक केंद्र है।
उनका कहना है कि पाक सेना के शामिल होने से इन महत्वाकांक्षी योजनाओं की सफलता सुनिश्चित हो सकेगी। वहीं पाकिस्तानी सेना की भागीदारी को इसलिए भी महत्वपूर्ण बताया गया है क्योंकि पाकिस्तान की नागरिक सरकार में अस्थिरता है।