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चीन: डोकलाम विवाद के बाद आज BRICS सम्मेलन, आतंकवाद पर पाक को घेर सकता है भारत

Sun, 03 Sep 2017 03:22 AM IST
एजेंसी/ नई दिल्ली 
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ब्रिक्स - फोटो : self
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भारत और चीन के बीच लगभग ढाई महीने तक खिंचे दोकलम सीमा विवाद की छाया में चीन के शियामेन शहर में रविवार से नौवां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शुरू हो रहा है। चीन इस सम्मेलन में खुद को 21वीं सदी के वैश्विक परिदृश्य के सबसे मजबूत स्तंभ के रूप में पेश करने की तैयारी में है, जबकि भारत पूरी दुनिया में अमन और चैन के लिए खतरा बन चुके पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को जोर-शोर से उठाने की कोशिश करेगा।
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इस शिखर सम्मेलन में पूरी दुनिया की नजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात पर होगी। दोनों के बीच सोमवार को बैठक होने की संभावना है। दोनों शीर्ष नेता विश्वास बहाली के उपायों पर चर्चा करेंगे। खासकर दोनों देशों के बीच दोकलम सीमा विवाद के मद्देनजर यह बहुत जरूरी हो गया है।

दोकलम के अलावा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एएलसी) पर नेपाल और म्यांमार के साथ लगे ट्राई जंक्शन पर भी भारत और चीन में तनातनी हो सकती है। इसके अलावा चीन के महात्वाकांक्षी ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबीओआर) पर भी विचार-विमर्श की संभावना है। भारत की ओर से स्पष्ट रूप से बताया जाएगा कि चीन की इस एकतरफा पहल से वह खुश नहीं है।   
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भारत इस बैठक में अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा पर सक्रिय आतंकी नेटवर्क के खिलाफ ठोस कदम उठाए जाने और दुनिया भर में फैल रहे अतिवाद को काबू में करने की योजना बनाए जाने की मांग करेगा। हालांकि जिनपिंग ने बृहस्पतिवार को ही स्पष्ट कर दिया है कि ब्रिक्स के मंच से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर कोई चर्चा नहीं होगी, फिर भी भारत इसे अपने तरीके से उठाएगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार आतंकवाद पर भारत का रवैया बहुत स्पष्ट है और वह इसे कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा भी चुका है।
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क्या होगा एजेंडा

इस शिखर सम्मेलन का सूत्र वाक्य है ‘उज्ज्वल भविष्य के लिए मजबूत साझेदारी’। इसके तहत तय किए गए एजेंडे में इन मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है:
- आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना
- राजनीतिक एवं सुरक्षा सहयोग
- एक-दूसरे के नागरिकों की आवाजाही
- अक्षय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन 
- ब्रिक्स क्रेडिट रेटिंग एजेंसी का गठन
- नए सदस्य देशों को शामिल करना
- पश्चिम की संरक्षणवादी नीतियों का विरोध

ब्रिक्स की बुनियाद
सबसे पहले गोल्डमैन सैश के एक अर्थशास्त्री ने 2001 में पश्चिमी देशों को चुनौती देने की क्षमता रखने वाले ब्राजील, रूस, भारत और चीन की उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए ब्रिक्स शब्द का इस्तेमाल किया। इन चार देशों ने 2009 में रूस में पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया। 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से इसके सदस्य देशों की संख्या पांच हो गई। इन देशों में दुनिया की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी रहती है, जबिक विश्व अर्थव्यवस्था में इसकी हिस्सेदारी 22 फीसदी है। इन देशों की औसत आर्थिक वृद्धि दर वैश्विक औसत से ज्यादा है।
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