चीन ने तिब्बत के सीमा क्षेत्र में आतंकवाद और अलगाववादियों खतरे से निपटने के लिए सुरक्षा नियमों को और भी सख्त कर दिया है। वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध लड़ चुके चीन ने यह कदम तिब्बत से लगी भारतीय सीमा पर इसलिए उठाया है ताकि तिब्बत के निर्वासित धार्मिक नेता दलाईलामा की अरुणाचल प्रदेश में होने वाली संभावित यात्रा को रोका जा सके।
चीन के सरकारी मीडिया ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने निर्वासित धार्मिक नेता दलाई लामा को एक खतरनाक अलगाववादी बताते हुए कहा कि भविष्य में तिब्बत के भीतर नए विवादों को देखते हुए आतंकी गतिविधियों से लड़ने के लिए एक कानूनी आधार बनाया है। इससे पहले यहां जमीन और व्यापार से संबंधित कानून हल्का था। यह सख्त कानून पुलिस को सीमा सुरक्षा का अधिक अधिकार देगा।
चीन के मुताबिक तिब्बत में अलगाववादी गतिविधियों पर लगाम लगाने के साथ-साथ घुसपैठ, अवैध प्रवास व आतंकवाद रोकने की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी। उल्लेखनीय है कि शांति का नोबल पुरस्कार हासिल कर चुके दलाई लामा चाहते हैं कि तिब्बत को स्वायत्तता मिली चाहिए। उन्होंने वर्ष 1959 में भारत की शरण ली है।