China Communist Party Congress- Xi Jinping
- फोटो : Agency (File Photo)
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 20वीं कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए पार्टी महासचिव शी जिनपिंग ने चीनी अर्थव्यवस्था की हरी-भरी तस्वीर पेश की। लेकिन चीनी अर्थव्यवस्था के जानकारों ने कहा है कि इस समय देश का मध्य वर्ग जैसे संकट में है, वैसा हाल चार दशक पहले सुधारों का दौर शुरू होने के बाद से कभी नहीं रहा। इस समय मध्य वर्ग के लोग रोजमर्रा की जिंदगी की बढ़ती लागत, प्रॉपर्टी सेक्टर में मंदी, आर्थिक विकास दर में गिरावट, और बढ़ती पेशेवर होड़ से गहरे तनाव में हैं।
पार्टी कांग्रेस के मौके पर सीपीसी ने शी जिनपिंग के शासनकाल के पहले दस वर्षों में मिली कामयाबियों का खूब बखान किया है। सेंट्रल कमेटी ने 20वीं कांग्रेस के लिए जिस रिपोर्ट को मंजूरी दी, उसमें इस दौरान करोड़ों लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने और देश में 50 करोड़ से अधिक लोगों का मध्य वर्ग उभरने का जिक्र किया गया। इसमें इस बात का उल्लेख किया गया कि इस सदी के आरंभ में चीन में मध्य वर्गीय लोगों की संख्या 15 करोड़ ही थी।
चीन संबंधी मामलों के पेरिस स्थित विशेषज्ञ ज्यां लुई रोका ने टीवी चैनल फ्रांस-24 से बातचीत में कहा- ‘चीन का चेहरा बहुत तेज रफ्तार से बदला है। कुछ वर्षों के दर ही करोड़ों लोग अपने परिवार का ऐसा पहला सदस्य बने, जिन्होंने यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की और जिन्हें अच्छी तनख्वाह वाली नौकरी मिली। देश में उपभोग का पैटर्न उसी अनुपात में बदल गया है।’
लेकिन विशेषज्ञों की राय है कि समृद्ध देश बनने ‘चीन का सपना’ अब हाथ से फिसलता नजर आने लगा है। देश में अब आर्थिक वृद्धि दर काफी घट चुकी है। इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार शी जिनपिंग की नीतियां ही हैं। उनकी जीरो कोविड नीति और बड़ी कंपनियों पर लगाम लगाने की नीति से देश की आर्थिक संभावनाओं पर तगड़ा प्रहार हुआ है। उधर अमेरिका ने ट्रेड वॉर को तेज करते हुए हाई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में चीन पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं।
रोका ने कहा- ‘अब आमदनी नहीं बढ़ रही है, जबकि रोजमर्रा का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। कई तरह के सामाजिक दबाव भी उभरे हैं। मसलन, लोगों में ऊंचे स्तर का जीवन जीने, बच्चों को महंगे स्कूलों में भेजने और महंगी कारें रखने का शौक बढ़ा है। इनकी वजह से लोग तनाव में हैं और उनके जीवन की गुणवत्ता गिर रही है।’
विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि चीन में इलाज का खर्च तेजी से बढ़ रहा है। इसकी वजह महंगाई तो है ही, इसके साथ ही लोग हाई लाइफ से होने वाली बीमारियों से पीड़ित होने लगे हैं। इसी बीच आवास क्षेत्र का संकट खड़ा हो गया। जानकारों के मुताबिक यह आंकड़ा तो आकर्षक लगता है कि चीन में 87 फीसदी परिवारों के पास अपना घर है और 20 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनके पास एक से अधिक प्रॉपर्टी है। लेकिन अब जो संकट खड़ा हुआ है, उसके बीच नौजवान लोगों के लिए अपने घर में रहने के सपने को साकार करना आने वाले समय में काफी मुश्किल हो जाएगा।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक शी जिनपिंग को भले ये भरोसा हो कि यह सामाजिक संकट राजनीतिक उथल-पुथल में नहीं तब्दील होगा, लेकिन देश में सतह के नीचे हालात सुलगते लग रहे हैं।