चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने धमकी दी है कि वह ताइवान का देश में विलय सुनिश्चित करने के लिए विकल्प के तौर पर सैन्य ताकत का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। चीनी राष्ट्रपति ने बुधवार को कहा कि इस द्वीप को आखिरकार दोबारा चीन के साथ मिलाया जाएगा। शी ने यहां तक कहा कि चीन इस काम में अड़ंगा लगाने वाले बाहरी तत्वों के खिलाफ सभी आवश्यक कदम उठाने का विकल्प खुला रखेगा।
जिनपिंग का इशारा अमेरिका जैसे देशों की तरफ था जो ताइवान को सहयोग देते रहे हैं। शी ने तल्ख लहजे में कहा कि ताइवान अपनी आजादी खारिज कर शांतिपूर्ण ढंग से चीन के साथ विलय को गले लगाए। यही सबसे बेहतर विकल्प रहेगा। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य ताइवान का चीन में विलय करना है और इसके लिए सैन्य बल का इस्तेमाल एक विकल्प है।
इस बयान को जिनपिंग की विस्तारवादी नीतियों से जोड़कर देखा जा रहा है जो कभी भी संप्रभु देशों का चीन में विलय कर सकता है। शी ने कहा कि चीन ताइवान के पुन: एकीकरण के लिए सैन्य बल का इस्तेमाल कतई बंद नहीं करेगा। यानी इस स्वतंत्र द्वीप पर कब्जा करने के लिए चीन के राष्ट्रपति ने सेना का खुला इस्तेमाल करने की धमकी दी है। बता दें कि ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के साथ ही बिना चीन को बताए ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन से फोन पर बातचीत की थी।
चीन समर्थकों की जीत से उत्साहित हैं शी
हालांकि ताइवान में हुए स्थानीय चुनाव में चीन समर्थक विपक्षी नेशनल पार्टी (एनपी) के 22 में से 15 सीटें जीतने को लेकर मौजूदा राष्ट्रपति चिंतित हैं। साई ने इस जीत के बाद अधिकारियों को चेताते हुए कहा कि वे चीन के साथ किसी भी गुप्त वार्ता में शामिल नहीं होना चाहिए। लेकिन ताइवान में चीन समर्थकों की बढ़त से जिनपिंग उत्साहित हैं।
1950 से ही आजाद रहा है ताइवान
चीन और ताइवान एक-दूसरे की संप्रभुता को मान्यता नहीं देते हैं। दोनों ही खुद को असली चीन मानते हैं। ताइवान ऐसा द्वीप है जो 1950 से ही आजाद रहा है, लेकिन चीन उसे अपना विद्रोही राज्य कहता है। उसका मानना है कि ताइवान को चीन में शामिल होना चाहिए, इसके लिए चाहे बल प्रयोग ही क्यों न करना पड़े।