अमेरिका और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ समय से कड़वाहट देखने को मिल रही है। अब इस तनाव को और बढ़ाते हुए अमेरिका चीन को दिए हुए 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (एमएफएन) के स्टेटस को वापस ले सकता है। अमेरिकी सीनेटर टॉम कॉटन ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। वे इसके खिलाफ एक विधेयक लेकर आए हैं।
कॉटन ने विधेयक की घोषणा करते हुए जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘बीस साल पहले इसी हफ्ते सीनेट ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को स्थायी रूप से 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' का दर्जा देकर एक उपहार दिया था। उस विनाशकारी फैसले ने पार्टी को अमीर बना दिया, लेकिन लाखों अमेरिकीयों की नौकरियों पर बन आई। यही समय है जब चीन से स्थायी व्यापार स्टेटस को खत्म करके अमेरिकी श्रमिकों की रक्षा और हमारे लाभ को वापस ले लिया जाए।’
विज्ञप्ति में कहा गया है कि चीन अब भी अमेरिका के साथ अपने एमएफएन के दर्जे को बरकरार रख सकता है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा प्रतिवर्ष विशेषाधिकार का नवीनीकरण किया जाएगा। अमेरिकी कांग्रेस ने राष्ट्रपति के निर्णय को रद्द करने की अनुमति दी है। विधेयक में मानव अधिकारों और व्यापार दुर्व्यवहारों की एक सूची भी शामिल है जो चीन को एमएफएन स्टेटस के लिए अयोग्य घोषित करेंगे। इसमें राष्ट्रपति द्वारा दी जाने वाली छूट शामिल नहीं है।
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विज्ञप्ति के अनुसार, सूची में गुलामी मजदूरी कराना, जेल शिविरों का उपयोग करके पुन: शिक्षा देना, जबरन गर्भपात या कैदियों की नसबंदी और अंगों को काटना शामिल है। सूची में शामिल अन्य अपराधों में धार्मिक उत्पीड़न, प्रवासी चीनी लोगों का उत्पीड़न और अमेरिकियों की बौद्धिक संपदा की चोरी करना शामिल है।
क्या होता है एमएफएन स्टेटस
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के जनरल अग्रीमेंट एंड टैरिफ्स एंड ट्रेड (जीएएटी) के तहत सदस्य देशों को एक-दूसरे के साथ वस्तुओं पर सीमा शुल्क के मामले में एक जैसा व्यवहार करना होता है। यह एक आर्थिक दर्जा होता है जिसे दो देशों के बीच होने वाले 'मुक्त व्यापार समझौते' के तहत दिए जाने का प्रावधान है। कोई देश जिन देशों को यह दर्जा देता है, उस देश को उन सभी के साथ व्यापार की शर्तें एक जैसी रखनी होती हैं।