China: Olaf Scholz and Xi Jinping
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चीन की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपना ध्यान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर केंद्रित कर दिया है। समझा जाता है कि पश्चिमी देशों के साथ चीन के बढ़ रहे तनाव के बीच वे अपने देश के लिए अधिक से अधिक समर्थन जुटाने की कोशिश में हैं। पिछले हफ्ते कई देशों के नेताओं ने बीजिंग की यात्रा की। इनमें पाकिस्तान, तंजानिया, वियतनाम और जर्मनी शामिल हैं। अब शी जिनपिंग विदेश यात्राओं पर निकलने वाले हैं। सबसे पहले वे इंडोनेशिया जाएंगे, जहां वे जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगले महीने उनका सऊदी अरब जाने का कार्यक्रम है।
पश्चिमी मीडिया में शी की कूटनीतिक गतिविधियों की विस्तार से चर्चा हुई है। समझा जाता है कि चीनी नेता के बयानों पर पश्चिमी देश कड़ी नजर रख रहे हैं। चीन की तेज हुई अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों को पिछले महीने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की 20वीं कांग्रेस के दौरान दिए गए शी जिनपिंग के भाषण से जोड़ कर देखा जा रहा है। तब शी ने ‘चीन के बाहरी खतरों’ का विस्तार से जिक्र किया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि पश्चिमी देश चीन के उदय को रोकने की कोशिश कर रहे हैं, जिसको लेकर कभी भी टकराव भड़क सकता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में चीन विशेषज्ञ स्टीव त्सांग ने कहा है- ‘शी ने यह साफ कर दिया है कि लगातार प्रतिकूल होते जा रहे अंतरराष्ट्रीय माहौल में चीन को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, इसलिए चीन को मुकाबले के लिए तैयार रहना चाहिए।’ अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन से बातचीत में त्सांग ने कहा- ‘शी ने अंतरराष्ट्रीय संपर्क बढ़ा दिया है और चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए वे तैयार हो रहे हैं।’
पिछले हफ्ते जर्मनी के चांसलर ओलोफ शोल्ज की हुई बीजिंग यात्रा को चीनी मीडिया में चीन की एक बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश किया गया है। शोल्ज जी-7 देशों में से ऐसे पहले नेता बने, जिन्होंने बीते तीन साल के अंदर चीन की यात्रा की है। बीजिंग में चीन के प्रधानमंत्री ली किचियांग से अपनी बातचीत के दौरान शोल्ज ने चीन के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखने पर जोर दिया। हालांकि उन्होंने मानव अधिकार जैसे मुद्दे भी उठाए, लेकिन इसे महज रस्म-अदायगी माना गया है।
अब निगाहें जी-20 शिखर सम्मेलन पर टिकी हैं, जिसका आयोजन 15 और 16 नवंबर को इंडोनेशिया के पर्यटन स्थल बाली में होगा। पिछले साल जी-20 शिखर सम्मेलन में चीन की नुमाइंदगी विदेश मंत्री वांग यांग ने की थी। लेकिन इस बार शी व्यक्तिगत रूप से वहां मौजूद रहेंगे। ऐसी चर्चा जोरों पर है कि बाली में शी की अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से आमने-सामने बातचीत हो सकती है। अगर ऐसा हुआ, दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात होगी।
कूटनीति विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय संबंधों में शी की प्राथमिकता फिलहाल चीन के मित्र देशों से संबंध को और मजबूत करना है। हाल में विभिन्न नेताओं की हुई बीजिंग यात्रा को चीन की इसी प्राथमिकता का संकेत माना गया है। चीन का आकलन है कि पश्चिमी देशों- खास कर अमेरिका से बेहतर संबंध की गुंजाइश अभी नहीं है। अधिक से अधिक उनसे तनाव नियंत्रित रखने पर सहमति बन सकती है।