अमेरिका और चीन के बीच जारी ट्रेड वॉर में ट्रंप द्वारा कई वस्तुओं पर बढ़ाए गए आयात शुल्क का एक अलग ही प्रभाव देखने में आया है। चीन से आने वाली चीजों पर भारी-भरकम टैरिफ का असर बाइबल की कीमतों पर पड़ सकता है, क्योंकि दुनिया की करीब आधी बाइबल चीन में ही छपती हैं। बाइबिल महंगी होने की खबरें से अमेरिकी धार्मिक समूह खफा हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन ने नाराजगी जताई है।
अब तक चीन से आने वाली 250 अरब डॉलर की वस्तुओं पर ट्रंप 25 फीसद का आयात शुल्क लगा चुके हैं। बदले में चीन ने भी यही कदम उठाया है। अब ट्रंप ने छपी हुई वस्तुओं समेत चीन से आने वाली 300 अरब डॉलर की वस्तुओं पर आयात शुल्क लगाने की बात कही है। आशंका जताई गई है कि इससे धार्मिक समूहों, चर्चों, स्कूलों, मंत्रालयों और कई गैर-लाभकारी संस्थाओं पर बोझ बढ़ सकता है।
अमेरिकी सांसद जोश हार्डर ने कहा, मुझे नहीं लगता कि ट्रंप ने बाइबिल पर अतिरिक्त कर लगाने का विचार किया होगा, लेकिन चीन पर लगने वाले आयात शुल्क से इस पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने ट्रंप को पत्र लिखकर चीन से आने वाली बाइबिल को आयात शुल्क के दायरे से बाहर रखने की अपील की है।
सीमित हैं विकल्प
इवेंजेलिकल क्रिश्चियन पब्लिशर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष स्टान जांट्स ने कहा कि अमेरिका में ईसाई प्रकाशक व बाइबिल सोसायटी चीनी प्रिंटिंग क्षमता और विशेषज्ञता पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि चीन के बाहर जाकर बाइबिल छापने के लिए प्रतिस्पर्द्धी विकल्प बेहद ही सीमित हैं। हार्पर कॉलिंस क्रिश्चियन पब्लिशिंग के अध्यक्ष मार्क स्कोनवल्ड ने भी कहा कि ट्रंप प्रशासन शायद ट्रेड वॉर के असर से अनभिज्ञ था।