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चीन-अमेरिका: समझौते से वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था में आएगी स्थिरता; भारतीय आईटी फर्मों पर पड़ेगा यह असर

Thu, 12 Jun 2025 06:11 AM IST
शिव शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ पृथ्वी धातुएं) जैसे खनिज स्मार्टफोन, बैटरी, रक्षा उपकरण और हाईटेक उद्योगों के लिए जरूरी हैं। अमेरिका लंबे समय से इन खनिजों के लिए चीन पर निर्भर रहा है। दूसरी ओर चीनी छात्रों को अमेरिकी शिक्षा प्रणाली तक पहुंच देना, दोनों देशों के शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा।
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डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग - फोटो : एएनआई / अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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अमेरिका और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं। इनके बीच व्यापार समझौता होने से वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था में अधिक स्थिरता आएगी। विशेषज्ञों के अनुसार समझौता वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को कम करेगा। इससे भारत को भी लाभ होगा। वैश्विक आर्थिक सुस्ती की आशंका कम होने से आईटी और मेटल जैसे क्षेत्रों को लाभ हो सकता है। उदाहरण के लिए अमेरिकी कंपनियों की ओर से चीनी तकनीक पर निर्भरता कम करने से भारतीय आईटी फर्मों को अधिक काम मिल सकता है। मेटल की मांग भी बढ़ सकती है।

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यह समझौता भारत को अपनी आंतरिक प्रतिस्पर्धात्मकता और 'मेक इन इंडिया' पहल को मजबूत करने के लिए प्रेरित करेगा। भारत को केवल टैरिफ लाभों पर निर्भर रहने की बजाय अपनी उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और लागत-दक्षता में सुधार करना होगा। सरकार की उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं और कुशल कार्यबल भारत को एक लचीला और आकर्षक मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाने में मदद कर सकते हैं। डेसकार्टेस डाटामाइन के आंकड़ों के अनुसार ट्रंप की ओर से पूर्व में चीन से आयातित वस्तुओं पर 145% टैरिफ लगाने के कारण अमेरिका के आयात में गिरावट आ गई थी। इसे देखते हुए दोनों-देशों के बीच समझौता होना जरूरी हो गया था।
 

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अमेरिका चीन टैरिफ युद्ध - फोटो : अमर उजाला
अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर अब भारत का फोकस
यह समझौता साफ संदेश हैं कि भारत को अमेरिका के साथ जल्द से जल्द एक अनुकूल द्विपक्षीय व्यापार समझौता करना चाहिए। अगर भारत अमेरिका के साथ एक मजबूत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर लेता है तो वह चीन पर टैरिफ लाभ को बरकरार और अपनी निर्यात बढ़ोतरी की रफ्तार को बनाए रख पाएगा।

चीन और अमेरिका के लिए यह डील क्यों है अहम
रेयर अर्थ मिनरल्स (दुर्लभ पृथ्वी धातुएं) जैसे खनिज स्मार्टफोन, बैटरी, रक्षा उपकरण और हाईटेक उद्योगों के लिए जरूरी हैं। अमेरिका लंबे समय से इन खनिजों के लिए चीन पर निर्भर रहा है। दूसरी ओर चीनी छात्रों को अमेरिकी शिक्षा प्रणाली तक पहुंच देना, दोनों देशों के शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा। यह समझौता व्यापार, शिक्षा और जियो पॉलिटिकल मोर्चे पर अमेरिका-चीन संबंधों में एक नया अध्याय खोल सकता है।
 
अमेरिका 55 फीसदी टैक्स किस तरह वसूलेगा
इस बीच, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि इस समझौते के बाद चीन से आने वाले सामानों पर अमेरिका कुल 55 फीसदी टैक्स लगाएगा। इसमें 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ (समानता बनाए रखने के लिए), 20 प्रतिशत टैरिफ फेंटानाइल तस्करी के खिलाफ और 25 फीसदी पहले से लागू टैरिफ का हिस्सा रहेगा। जबकि, अमेरिका से आने वाले उत्पादों पर चीन सिर्फ 10 फीसदी टैक्स लगाएगा।
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