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China Ukraine plan: कारगर हो रही है यूक्रेन पर ‘रणनीतिक अस्पष्टता’ की चीन की नीति?

Sat, 29 Apr 2023 01:12 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स

सार

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर जेलेंस्की के साथ फोन पर लंबी बातचीत की। इसमें उन्होंने जेलेंस्की को आश्वासन दिया कि चीन ‘आग में घी नहीं डालेगा’ और उसकी राय में जारी टकराव को खत्म करने का एकमात्र तरीका बातचीत है...
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Xi Jinping and Vladimir Putin - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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ऐसा लगता है कि चीन ने यूक्रेन के मामले में ‘रणनीतिक अस्पष्टता’ की नीति अपना ली है। पश्चिमी विश्लेषकों के मुताबिक यह नीति ठीक उसी तरह की है, जैसी अमेरिका ने चीन से मौजूदा टकराव शुरू होने के पहले ताइवान के बारे में लगभग चार दशक तक अपनाए रखी थी।

इन विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि चीन लगातार हर देश की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता की रक्षा पर जोर डालता है। लेकिन उसने यूक्रेन पर रूस के हमले की आज तक निंदा नहीं की है। इसके विपरीत उसने रूस के साथ ‘बिना किसी सीमा की दोस्ती’ की बात दोहराना जारी रखा है।

हाल में फ्रांस स्थित चीनी राजदूत लू शाये ने यह बयान देकर पश्चिमी राजधानियों में गहरी चिंता पैदा कर दी कि पूर्व सोवियत गणराज्यों का ‘अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कोई दर्जा नहीं है, क्योंकि उनकी संप्रभु हैसियत के बारे में कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता मौजूद नहीं है।’ इस बयान से मची हलचल के बीच चीन के विदेश मंत्रालय ने तुरंत यह स्पष्टीकरण दे दिया कि वह पूर्व सोवियत गणराज्यों का एक संप्रभु देश के रूप में सम्मान करता है। इससे माहौल थोड़ा ठंडा हुआ, लेकिन राजदूत लू शाये के बयान के पीछे के मकसद को लेकर अब भी कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ विश्लेषकों ने इसे रणनीतिक अस्पष्टता की सुविचारित नीति का हिस्सा बताया है।

इस बीच यूरोपियन यूनियन (ईयू) के लिए चीनी राजदूत फू कोंग ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा है कि जिस तरह रूस के साथ चीन का सहयोग असीमित है, उसी तरह यूरोप के साथ उसका सहयोग अनंत है। इस इंटरव्यू के तुरंत बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदोमीर जेलेंस्की के साथ फोन पर लंबी बातचीत की। इसमें उन्होंने जेलेंस्की को आश्वासन दिया कि चीन ‘आग में घी नहीं डालेगा’ और उसकी राय में जारी टकराव को खत्म करने का एकमात्र तरीका बातचीत है।

ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ बर्मिंघम में प्रोफेसर स्टीफन वूल्फ ने एक टिप्पणी में लिखा है- ‘इसमें कोई छिपी बात नहीं है कि यूक्रेन युद्ध का ईयू-चीन संबंध पर बहुत खराब असर पड़ा है। हाल में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ईयू की अध्यक्ष उरसुला वॉन डेर लियेन और जर्मन विदेश मंत्री एनालीना बेयरबॉक की चीन यात्रा के बाद इस बारे में कोई संदेह नहीं बचा है।’

वेबसाइट कन्वर्सेशन.कॉम पर छपी टिप्पणी में वूल्फने कहा है कि इन नेताओं की यात्रा से यह भी सामने आया कि चीन के बारे में उनका नजरिया अलग-अलग है। ऐसी खबरें छपी हैं कि मैक्रों चीन के साथ मिल कर रूस और यूक्रेन के बीच समझौता कराने की किसी योजना पर काम कर रहे हैं। उन्होंने हाल में यह बयान भी दिया कि यूरोप को अमेरिका का अधीनस्थ नहीं बने रहना चाहिए।

मैक्रों की चीन से इस नजदीकी की ज्यादातर यूरोपीय नेताओं ने आलोचना की है। लेकिन इटली के रक्षा मंत्री गुइदो क्रोसेतो ने इस सोच का समर्थन किया है कि रूस और यूक्रेन के बीच चीन मध्यस्थता करे। विश्लेषकों के मुताबिक बीते छह महीनों के अंदर लगभग सभी प्रमुख यूरोपीय नेताओं ने चीन की यात्रा की है। उनमें जर्मनी के चांसलर ओलोफ शोल्ज भी शामिल हैं। इसे इस बात का संकेत माना गया है कि यूरोपीय नेता चीन के साथ अपने रिश्ते को बहुत अहमियत दे रहे हैं। यह इस बात भी संकेत है कि यूक्रेन के मामले में चीन की ‘रणनीतिक अस्पष्टता’ की नीति कारगर हो रही है।

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