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ताइवान के सवाल पर चीन ने दी भारतीय मीडिया को नसीहत

Tue, 28 Apr 2020 05:30 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

  • ताइवानी विदेश मंत्री के इंटरव्यू पर आपत्ति, आजाद ताइवान की बात करने वालों को मंच न दें
  • चीन ने कहा, कोविड-19 के बहाने डीपीपी चला रही है अपना राजनीतिक एजेंडा
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Taiwan Foreign Minister Joseph Wu - फोटो : Social Media
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विस्तार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन में ताइवान की स्वतंत्र भागीदारी और ताइवान की आजादी का दावा करने वाले ताइवानी विदेश मंत्री जोसेफ जोशिए वू के एक इंटरव्यू पर चीन ने कड़ी नाराजगी जताई है। चीन ने भारतीय मीडिया से कहा है कि वो ताइवान की आजादी का दावा करने वाली ताकतों को मंच न दें और इस मुद्दे की गंभीरता को समझें।

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ताइवान के मुद्दे पर भारतीय मीडिया को नसीहत देते हुए चीन ने इसे संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का मामला बताया है।

दिल्ली स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता जी रोंग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि चीन ने इस बारे में बार-बार अपनी स्थिति स्पष्ट की है कि पूरी दुनिया में ‘वन चाइना’ सिद्धांत को मान्यता है। यहां तक कि भारत भी ये मानता है कि चीन एक है और ताइवान उसका हिस्सा है।

ऐसे में ताइवान का अलग से विश्व स्वास्थ्य संगठन में अपनी बात रखने का सवाल कहां उठता है। बयान में कहा गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन एक ऐसी संस्था है जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र ने केवल संप्रभु देशों को मान्यता दी है और ताइवान को चीन का हिस्सा रहते हुए इसमें शामिल होने का कोई हक नहीं है।
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चीन का दावा है कि उसकी सरकार ताइवान के नागरिकों की सुरक्षा और सेहत का पूरा ध्यान रखती है। कोविड-19 फैलने के तुरंत बाद चीन ने ताइवान को इसके लिए सावधान करने के साथ ही एहतियाती कदम उठाने को लेकर नोटिफिकेशन भेज दिया था और इस काम में जरा भी देरी नहीं की गई।

चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से किए गए इंतजामों के तहत ताइवान के मेडिकल एक्सपर्ट्स अभी भी विश्व स्वास्थ्य संगठन की बैठकों में हिस्सा भी ले सकते हैं। जाहिर है इतने इंतजामों के बाद ताइवान अपने इलाके में जनस्वास्थ्य की आपात जरूरतें पूरी करने में सक्षम है। यह काम बेहद प्रभावी तरीके से और सही समय पर कर सकता है।

चीन ने ताइवान की आजादी और विश्व मंचों पर स्वतंत्र देश की पहचान बनाने की कोशिश को साजिश करार देते हुए इसके लिए सीधे-सीधे वहां की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (डीपीपी) को जिम्मेदार ठहराया है।

बयान में कहा गया है कि डीपीपी की मंशा है कि महामारी के बहाने वह ताइवान की आजादी और वन चाइना, वन ताइवान का राजनीतिक एजेंडा चलाए। इसलिए भारतीय मीडिया ऐसी ताकतों को तरजीह न दे।

हाल ही में भारत की तारीफ करते हुए ताइवानी विदेश मंत्री जोसेफ जोशिए वू ने एक इंटरव्यू में कहा था कि ताइवान प्रधानमंत्री मोदी के आर्थिक विकास के कामों का मुरीद है और दोनों देशों के बीच सहयोग की अद्भुत संभावनाएं हैं।

वू ने कहा था कि ताइवान सरकार भारत के साथ साझा हितों और साझा लाभ के लिए मिलकर काम करती रहेगी। साथ ही चीन फैक्टर को दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों में बाधा नहीं डालने देगी।

गौरतलब है कि एयर इंडिया ने अपनी वेबसाइट पर ताइवान का नाम बदलकर चाइनीज ताइपे कर दिया है, जिस पर ताइवान ने नाराजगी जताई थी, लेकिन चीन ने इस पर खुशी जताते हुए कहा था कि भारतीय विमानन कंपनी इस तथ्य का सम्मान करती है कि दुनिया में केवल एक चीन है और ताइवान चीन का अभिन्न अंग है।

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