नेपाल ने चीन के प्रति सख्त रवैया अपनाते हुए कहा है कि वह अपने यहां प्रेस की आजादी को लेकर प्रतिबद्ध है और चीन को कोई हक नहीं कि वह सीधे तौर पर नेपाली मीडिया और संपादकों पर कोई आपत्तिजनक टिप्पणी करे या धमकी दे।
नेपाल के 17 संपादकों ने एक साझा विज्ञप्ति जारी कर चीन के रवैये की कड़ी आलोचना की है और कहा है कि नेपाली मीडिया, लेखक, संपादक या इलस्ट्रेटर के खिलाफ चीन का धमकी भरा रवैया कतई मंजूर नहीं किया जा सकता।
संपादकों का आरोप है कि 18 फरवरी को चीनी दूतावास ने नेपाल के एक अखबार में छपे लेख और इलस्ट्रेशन को लेकर खासी नाराजगी दिखाई थी और संपादक समेत लेखक और कार्टूनिस्ट का नाम लिखकर उन्हें धमकी दी थी।
यह लेख नाटो के एक पूर्व अमेरिकी राजदूत का है जिसमें कहा गया है कि कोरोना को लेकर चीन के संदिग्ध और रहस्यमय रवैये से दुनिया भर में डर और आतंक का माहौल फैल गया है। इसमें लगाए गए कार्टून में चीनी क्रांति के महानायक माओ त्से तुंग को मॉस्क लगाए दिखाया गया है।
नेपाली मीडिया में चीन को लेकर उठे इस विरोध को नेपाल सरकार ने भी गंभीरता से लिया है और कहा है कि नेपाली मीडिया की स्वतंत्रता बरकरार रहेगी और इसपर कोई आंच नहीं आने दी जाएगी। नेपाली मीडिया में विरोध स्वरूप वह लेख दोबारा छापा गया है।