ताइवान क्षेत्र में चीन के सैनिक अभ्यास के दौरान दागी गई मिसाइलों के जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र में आ गिरने से जापान और चीन के बीच टकराव बढ़ गया है। जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजी) में मिसाइलों के गिरने का एलान खुद जापान के रक्षा मंत्री नोबुओ किशी ने किया। उसके तुरंत बाद जापान सरकार ने चीन को सख्त भाषा में एक कूटनीतिक विरोध पत्र भेजा। इसमें इस बात जिक्र किया गया कि पहली बार जापान के ईईजी तक चीनी मिसाइलें पहुंची हैं।
लेकिन चीन ने जापान के विरोध को ठुकरा दिया है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जिस क्षेत्र में मिसाइलें गिरीं, वहां चीन और जापान के बीच सीमा का निर्धारण नहीं हुआ है। इसलिए जापान का ये दावा गलत है कि मिसाइलें उसके इलाके में गिरीं।
अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के विरोध में चीन ने चार दिन का सैनिक अभ्यास गुरुवार को शुरू किया। पहले ही दिन चीनी सेना ने उन थल, जल और वायु क्षेत्रों में अभ्यान किया, जहां पहले चीनी सेना नहीं जाती थी। इस दौरान ताइवान के ऊपर से मिसाइलें दागी गईं। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बताया है कि ताइवान बड़े पैमाने पर साइबर हमले का भी शिकार हुआ है। रक्षा मंत्रालय ने कहा- ‘चीन की कार्रवाइयों से साफ संकेत मिलता है कि चीन का इरादा यथास्थिति को बदलना और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता को अवरुद्ध करना है।’ चीन का दावा है कि ताइवान उसका ही क्षेत्र है, इसलिए वह अपने देश के अंदर सैनिक अभ्यास कर रहा है।
जापान ने मिसाइलों की दिशा के बारे में जो नक्शा जारी किया, उसके मुताबिक कम से कम एक मिसाइल ताइवान के ऊपर से होते हुए जापान के ईईजी में आकर गिरी। जापान ने इसे चीन की तनाव बढ़ाने की एक बड़ी कार्रवाई माना है। जापान ने कहा है- ‘हम तनाव बढ़ाना नहीं चाहते। लेकिन जब हमारी सुरक्षा और संप्रभुता की बात आती है, तो हमें उनके पक्ष में खड़ा होना पड़ेगा।’
मिली सूचना के मुताबिक चीन चार दिन में सात समुद्री क्षेत्रों में सैनिक अभ्यास करेगा। उन इलाकों से वायु क्षेत्र को भी इसमें शामिल किया जाएगा। इससे ताइवान के लगभग सभी प्रमुख उड्डयन और जहाजरानी रास्ते प्रभावित होंगे। ताइवान ने कहा है कि ये अभ्यास एक तरह से ताइवान की नौसैनिक और वायु घेराबंदी करना है। इस सैनिक अभ्यास को देखते हुए ताइवान से जाने वाली कई उड़ानों के रास्ते में बदलाव किया गया है। अब विमान चीन के वायु क्षेत्र के बजाय जापान और फिलीपीन्स के ऊपर से गुजर रहे हैं।
चीनी मामलों के विशेषज्ञ रॉड्रिक ली ने अखबार जापान टाइम्स से कहा- ‘चीन का मकसद सैनिक दबाव डालना है, जिससे ताइवान खुद को घिरा महसूस करे।’ अमेरिकी थिंक टैंक रैंड कॉरपोरेशन में चीन संबंधी अनुसंधानकर्ता क्रिस्टीना गाराफोला ने कहा- ‘ताइवान के पूर्वी इलाके में दबाव बढ़ा कर चीनी सेना उसी प्रवृत्ति को दोहरा रही है, जिसे हमने उसकी कई ट्रेनिंग और दूसरी गतिविधियों के दौरान देखा है। इस बार नई बात यह है कि ताइवान के बेहद करीब जाकर कई स्थलों पर एक साथ अभ्यास किया जा रहा है।’