अमेरिकी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के अब गंभीर परिणाम सामने आ रहे हैं। चीन ने न सिर्फ ताइवान पर दबाव बढ़ा दिया है, बल्कि उसने जलवायु परिवर्तन समेत कई महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर अमेरिका के साथ बातचीत निलंबित कर दी है। उसने रक्षा मामलों में अमेरिका के साथ तय दो वार्ताओं को रद्द कर दिया है।
इस बीच चीन ने ताइवान पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए हैं। एक ताजा निर्णय में उसने ताइवान स्थित कंपनियों के उन तमाम उत्पादों के आयात पर रोक लगा दी है, जिन पर मेड इन ताइवान लिखा हो। इसके बदले उसने कंपनियों से मेड इन ताइवान-चाइना लिखने को कहा है। मशहूर फोन निर्माता कंपनी एपल ने तुरंत अपने कारखाने को चीन के इस निर्णय पर अमल करने का आदेश जारी कर दिया।
विश्लेषकों ने कहा है कि अतीत में भी किसी पश्चिमी राजनेता की ताइवान यात्रा पर चीन नाराजगी जताता था, लेकिन इस बार उसका विरोध अधिक तीव्र और ठोस है। इस बार वह अपनी चेतावनियों पर अमल करता दिख रहा है। उसने जिस बड़े पैमाने पर ताइवान के क्षेत्र में जाकर सैनिक अभ्यास किया है, वैसा उसने पहले कभी नहीं किया। इस दौरान उसके लड़ाकू विमान ताइवान के वायु क्षेत्र में गए हैं और ताइवान के ऊपर से उसने मिसाइलें दागी हैं।
ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि चीन की कार्रवाइयों की अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूरोपियन यूनियन आदि ने निंदा की है, लेकिन उसके बाद चीन ने अपनी प्रतिक्रिया और तीव्र कर दी। उन्होंने इस मामले में उसके खिलाफ बयान जारी करने वाले तमाम देशों पर चीन के आंतरिक मामलों में दखल देने का आरोप लगाया। इस दौरान दुनिया भर में चीनी राजदूतों ने बयान जारी कर या पत्रकारों से बातचीत कर चीन के रुख को दो टूक जताया है।
ताइवान के लोगों में अब यह सोच गहरा रही है कि चीन ‘शांतिपूर्ण एकीकरण’ के अपने वादे से हट गया है। उधर चीन समर्थक टीकाकारों का कहना है कि ताइवान ने ‘शांतिपूर्ण एकीकरण’ का वादा 1970 के दशक में अमेरिका से बनी अपनी सहमति के तहत किया था। उस सहमति के तहत अमेरिका ने खुद को ‘वन चाइना पॉलिसी’ (यानी ताइवान को चीन का हिस्सा मानने) के प्रति वचनबद्ध किया था। चीन का आरोप है कि अमेरिका अब वादे से हट गया है।
वैसे द गार्जियन के मुताबिक ताइवान में आम राय यही है कि चीन तुरंत हमला कर ताइवान के एकीकरण की कोशिश नहीं करेगा। ताइवान के लोकप्रिय अवकाश स्थल शिआओलियुचियु में पर्यटन नौका संचालक मिस ली ने द गार्जियन से कहा- ‘चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में हमला करने की क्षमता नहीं है। वह सिर्फ कुछ दिखावटी कार्रवाई कर रही है।’
इसके बावजूद चीन ने जो तेवर दिखाए हैं, उससे अंतरराष्ट्रीय जगत में चिंता बढ़ी है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटारेस ने कहा है कि दुनिया में आज कोई बड़ी समस्या ऐसी नहीं है, जिसका हल बिना अमेरिका और चीन के सहयोग के ढूंढा जा सके। जबकि पेलोसी की यात्रा के बाद ऐसे सहयोग की संभावना और घट गई है।